June 13, 2026

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में फसल अवशेष प्रबन्धन हेतु जनपद स्तरीय जागरुकता कार्यक्रम का किया गया आयोजन-

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जिलाधिकारी की अध्यक्षता में फसल अवशेष प्रबन्धन हेतु जनपद स्तरीय जागरुकता कार्यक्रम का किया गया आयोजन

 

जिलाधिकारी ने फसल अवशेष न जलाये, बल्कि इससे लाभ उठाये नामक संदेश वाहन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया

 

विशेषज्ञों के द्वारा मृदा स्वास्थ्य प्रबन्धन, पराली प्रबन्धन के बारे में कृषकों को दी गयी जानकारी

 

जिलाधिकारी श्री संजय कुमार खत्री की अध्यक्षता में जिला पंचायत के सभागार में मंगलवार को फसल अवशेष प्रबन्धन हेतु जनपद स्तरीय जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी ने कृषकों से अपील की कि कृषक पराली न जलाकर उसका प्रबंधन करें, जिससे भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ेगी तथा किसान अर्थदण्ड से भी बच सकेंगे। जिलाधिकारी द्वारा कृषकों को सरसों मिनीकिट का वितरण भी किया गया। नई टेक्नीक अपनाकर आप अपनी आय में बढ़ोत्तरी कर सकते है। किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक करने से पर्यावरण का प्रदूषण पहले की अपेक्षा कम हुआ है। फसलों के अवशेष जलाने से उनके जड़, तना, पत्तियों के लाभदायक पोषक तत्व नष्ट हो जाते है। जिलाधिकारी ने फसल अवशेष न जलाये, बल्कि इससे लाभ उठाये नामक संदेश वाहन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया, जो ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमणकर किसान भाईयों को पराली से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करेंगी।

डा0 योगेश श्रीवास्तव वैज्ञानिक शुआट्स विश्वविद्यालय नैनी, प्रयागराज द्वारा मृदा स्वास्थ्य प्रबन्धन के बारे में विस्तार से कृषकों को जानकारी देते हुए बताया गया किपराली जलाने से मृदा का स्वास्थ्य खराब होता है इसलिए किसान भाई पराली को न जलायें। पौधें को 17 तत्वों की जरुरत होती है जोकि गोबर की खाद तथा कम्पोस्ट खाद सेप्राप्त होते है। इन खादों के प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति अच्छी बनी रहती है। डा0 मदनसेन वैज्ञानिक शुआट्स विश्वविद्यालय नैनी, प्रयागराज द्वारा पराली प्रबन्धन के बारे में विस्तार से कृषकों को बताया गया कि पराली में जीवांश कार्बन होता है इसलिए पराली को कल्टीवेटर या मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई कर नीचे पलट दें तथा 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर यूरिया डाल कर खेत में पानी भर दें जिससे पराली सड़ कर खाद के रूप में परिवर्तित हो जायेगी इससे जमीनमें कार्बन की मात्रा बढ़ जायेगी। उप कृषि निदेशक द्वारा पराली न जलाये जाने के बारे में विस्तार से चर्चा की गयी। कृषकों को बताया गया कि मा0 राष्ट्रीय हरित न्यधिकरण की धारा-24 एवं26 के अन्तर्गतखेत में फसल अवशेष जलाया जाना एक दण्डनीय अपराध है, पर्यावरण क्षतिपूर्ति हेतु दण्ड के प्रावधान में 02 एकड़ से कम क्षेत्र के लिये 2500 रु0 प्रति घटना, 02 एकड़ से 05 एकड़ क्षेत्र के लिये 5000 रु0 प्रति घटना, 05 एकड़ से अधिक क्षेत्र केलिये 15000 रु0 प्रति घटना निर्धारित है। अपराध की पुनरावृत्ति करने पर कारावास एवं अर्थदण्ड से दण्डित किया जाने का प्रावधान है। इस बार पराली जलाने के बजाय पराली निकटस्थ गौशालाओं को दान दिये जाने पर मिलेगी खाद के बारे में बताते हुए कृषकों को जानकारी दी गयी कि ‘‘ पराली लाओं-खाद पाओं‘‘ की रणनीति बनायी गयी है इससे पराली जलाये जाने की घटना न्यून होगी। उप कृषि निदेशक द्वारा जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, मा0 सदस्य कृषि समृद्धि आयोग के सदस्य उ0प्र0 श्री कुलजीत सिंह, श्री अशोक कुमार मौर्य, परियोजना निदेशक,उपायुक्त, मनरेगा, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालय शुआट्स नैनी तथा उपस्थित अधिकारियों एवं कृषकों का स्वागत करते हुयेे फसल अवशेष को न जलाने के बारे में जानकारी दी गयी।