प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम नहीं कराए जाने से खतरे में 15 ऊंटों की जान
– एक की मौत के बाद दो की हालत गंभीर, मामला कोर्ट में, आदेश के बाद ही होगी कार्रवाई
वाराणसी के रामनगर में तस्करों से बचाए गए 16 ऊंटों में से एक की मौत की बाद अब दो की हालत और गंभीर हो गई है. ऊंटों को रामनगर पुलिस की निगरानी में भीटी स्थित अहाते में रखा गया है. आपको बता दें कि 27 जून की रात 16 ऊंटों को रामनगर पुलिस ने मुक्त कराया था. गौ-ज्ञान फाउंडेशन की सूचना पर 16 ऊंटों को रामनगर पुलिस ने मुक्त कराया था. फाउंडेशन के अधिवक्ता सौरभ तिवारी के कोर्ट में आवेदन पर अदालत ने सभी ऊंटों को राजस्थान के सिरोही स्थित पशु आश्रय स्थल भिजवाने का जिलाधिकारी को आदेश दिया था, लेकिन जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने फंड न होने का हवाला देकर आगे की कार्रवाई नहीं की. वहीं, फाउंडेशन ने कोर्ट की शरण लेकर डीएम की ओर से आदेश नहीं माने जाने की बात बताई गई, जिसके बाद कोर्ट ने डीएम को शोकॉज नोटिस देते हुए जवाब मांगा है.
दो ऊंटों की हालत गंभीर
रामनगर पुलिस की निगरानी में भीटी स्थित अहाते में रखा गए ऊंटों में कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है. जानकारों की मानें तो आहते में कीचड़ फैल गया है, जबकि ऊंटों को रेतीले जगहों पर चलने की आदत होती है. ऊपर से ये लार्ज एनिमल होते हैं और इन्हें चलने की आदत होती है. ऊंटों को जिस जगह रखा गया है, वहां उन्हें चलने की कोई सुविधा नहीं है, जिस कारण पैर खराब होने के साथ-साथ बीमार पड़ रहे हैं. इसके अलावा ऊंटों को जिस प्रकार के पत्ते खाने को चाहिए वो उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जबकि उन्हें भूसा दिया जा रह है. राजस्थान एक्ट के मुताबिक कोई भी ऊंट राजस्थान से बाहर नहीं होना चाहिए. इतना ही नहीं देश में ऊंटों की प्रजाति विलुप्त होती जा रही है.
फाउंडेशन ने लगाए आरोप
रामनगर में रखे ऊंटों को पहुंचाने के लिए प्रशासन और गौ ज्ञान फाउंडेशन आमने-सामने है. फाउंडेशन ने बताया कि पशु क्रूरता अधिनियम 2017 के तहत जो पशु भी छुडाया जाता है वो वहीं के लोकल प्रशासन के अंतर्गत आता है, लेकिन वाराणसी डीएम कौशल राज शर्मा ने ऊंटों को भेजने में दिलचस्पी नहीं दिखा कर संवेदनहीनता का परिचय दिया है.
संस्था ने उठाया बीड़ा
ऊंटों को पहुंचाने के लिए अब गौ ज्ञान फाउंडेशन के कंधे से कंधा मिलाते हुए लखनऊ की एक जीव आश्रय संस्था भी आगे आई है. इन दोनों संस्थानों ने आपसी सहयोग से ऊंटों को पहुंचाने का जिम्मा उठाया है. इनको पहुंचाने में लगभग डेढ लाख का खर्च आएगा, जिसका वहन करने के लिए ये दोनो संस्था तैयार है, लेकिन प्रशासन से परमिशन लेटर, एक डॉक्टर, एक पुलिस कर्मी और बालू की सुविधा मुहैया नहीं कराया जा रही है, जिस कारण ऊंटों की जिंदगी अब खतरे में नजर आने लगी है.
ये है पूरा मामला
27 जून को गौ ज्ञान फाउंडेशन कि सदस्य आर लता देवी के सहयोग से रामनगर पुलिस ने तीन गो तस्करों को पकड़ते हुए डीसीएम में क्रूरता से रखे गए 16 ऊंटों को बरामद किया था. जिसके बाद तस्करों से बचाए गए 16 ऊंटों को उनके प्राकृतिक वातावरण में रखने के लिए रामनगर से राजस्थान के सिरोही भेजने का आदेश अदालत ने दिया था. ऊंटों की अभिरक्षा के लिए गौ ज्ञान फाउंडेशन की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए एसीजेएम प्रथम नितेश कुमार सिन्हा की अदालत ने ऊंटों को पिपुल फार एनिमल आश्रय स्थल व पशु चिकित्सालय भेजने के लिए जरूरी इंतजाम करने का आदेश जिलाधिकारी वाराणसी को दिया था. अदालत ने आदेश दिया था कि गौ ज्ञान फाउंडेशन को ऊंटों की अभिरक्षा तब तक दी जाए जब तक मुकदमा चल रहा है.
अदालते के आदेश
– कोर्ट ने जिलाधिकारी वाराणसी को आदेश दिया कि ऊंटों को रामगनर से राजस्थान के सिरोही स्थित पिपुल फार एनिमल केयर आश्रय स्थल और पशु चिकित्सालय भेजने के लिए जरूरी इंतजाम करें.
– सभी 16 ऊंटों को राजस्थान ले जाने से पहले उनके रंग आदि के साथ पूरा विवरण दर्ज किया जाए.
– हर ऊंट पर मौजूद चिह्न को भी दर्ज किया जाए.
– अलग-अलग एंगल से उनकी फोटो ली जाए.
– इनकी कीमत भी किसी विशेषज्ञ के जरिए आंकी जाए.
– ऊंटों को राजस्थान ले जाते वक्त उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा जाए.
– शिफ्टिंग की पूरी रिपोर्ट और फोटो भी अदालत में पेश किया जाए.
– अदालत ने ऊंटों की शिफ्टिंग के लिए जांच अधिकारी को खुद राजस्थान के सिरोही जाने का आदेश दिया.
ऊंटों पर होने वाले प्रतिदिन खर्च
– एक ऊंट का आहार प्रतिदिन 20 किलो कैटलशीट खाता है.
– 50 किलो का बोरा 930 रुपए में आता है
– प्रतिदिन ऊंटों के खाने पर 7000 रुपए खर्च हो रहे हैं
– निजी संस्था ऊठा रही खर्च, प्रशासन पीछे हटा
अगर हम 13 जुलाई को ऊंट ले लेते तो हम सिरोही कैसे भेजते क्योंकि डीएम की ओर से किसी प्रकार की सुविधा नहीं दी गई थी, जिस कारण से हम कोर्ट की शरण में गए हैं, अब मामला कोर्ट के हाथ में हैं.
स्वाति बालानी, एनिमल एक्टिविस्ट





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