*3 भारतीय युवाओं का कमाल, अपने अनोखे ऐप से चाईनीज कंपनियों को दे रहे मात*

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*3 भारतीय युवाओं का कमाल, अपने अनोखे ऐप से चाईनीज कंपनियों को दे रहे मात*

हाल ही में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर जो मामला उठा है, वह सैनिकों के बीच झड़प के बाद देश के करोड़ों लोगों की भावनाओं तक पहुँच चुका है। और जब बात आम लोगों की भावनाओं तक पहुँच जाए फिर तो हर मोर्चे पर विरोध की आवाज उठने लगती है।

हाल की घटनाओं के बाद हिन्दुस्तान में चीन से आयात होने वाली चीजों से लेकर वहां की कंपनियों के उत्पाद, इंटरनेट पर मौजूदगी जमाई चाईनीज ऐप तमाम चीजों के बहिष्कार की आवाज बुलंद हो गई है। अगर डिजिटल इकोनॉमिक स्पेस की बात करें तो इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के मामले में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। 500 मिलियन मासिक सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के साथ भारत पूरे विश्व के लिए एक बड़ा बाजार है।

ऐसे में कई चाईनीज समूह भारतीय उपयोगकर्ताओं को मद्देनज़र रखते हुए भारत में पैठ जमाए बैठे हैं। किन्तु भारत जैसे देश में जहाँ संभावनाएं अपार हैं तो प्रतिभाओं की भी कोई कमी नहीं है। हमारे देश की युवा शक्तियों ने चीन को उसी के खेल में काँटे की टक्कर दी है। आज हम ऐसे ही तीन प्रतिभाशाली युवाओं की कहानी लेकर आये हैं, जो अपने ऐप के माध्यम से चाईनीज समूहों को कड़ा मुकाबला देने के लिए तैयार हैं।

गौरतलब है कि बिहार के तीन युवाओं ने ‘मैगटैप’ (MagTapp) नामक एक वेब ब्राउज़र बनाया है, जो अलीबाबा समूह की बेहद लोकप्रिय ऐप यूसी ब्राउज़र से बेहतर साबित हो रहा है। इस ऐप की सबसे बड़ी ख़ासियत उसकी इनबिल्ट ‘विजुअल डिक्शनरी’ है। इसकी मदद से किसी भी दूसरी भाषा के शब्द का अर्थ व चित्र दोनों अपनी भाषा में देखा और सुना जा सकता है।

यह ऐप अपनी अनूठी खासियत से लोगों के बीच चर्चा का विषय बन रहा है। गूगल प्ले स्टोर पर लॉन्च से लेकर अब तक इसे 5 लाख से भी ज्यादा लोगों ने डाउनलोड किया है। लाखों उपयोगकर्ताओं के साथ यह ऐप अपनी केटेगरी में शीर्ष स्थान पर ट्रेंड भी कर रहा है।

आपकी जानकारी के लिए बताना चाहते हैं कि इस ऐप की कोडिंग बिहार के एक 19 वर्षीय युवा रोहन सिंह ने की है। रोहन जब 12वीं की पढ़ाई कर रहे थे, इसी दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से उनका संपर्क बिहार के ही चर्चित उपन्यासकार सत्यपाल चंद्रा से हुई। फिर दोनों ने मिलकर इस पर आगे की कार्य योजना बनाई और महीनों के अथक प्रयासों के बाद लोगों के सामने पेश किया। इस कार्य में रोहन के भाई अभिषेक सिंह ने भी अहम भूमिका निभाई है।

सत्यपाल चंद्रा की मानें तो ‘मैगटैप’ पूरी तरह से ‘मेड इन इंडिया’ प्रोडक्ट है जिसमें आपको ‘विजुअल ब्राउज़र’ के साथ-साथ डॉक्यूमेंट रीडर, ट्रांसलेशन और ई-लर्निंग की सुविधा एक साथ मिलेगी। यह ऐप अंग्रेजी के किसी भी शब्द या वाक्य को देश की 12 भाषाओं में अनुवाद कर सकता है।

कायदे से देखें तो ऐप में आपको कई ऐसे फीचर्स मिल रहे, जिसे एक साथ इस्तेमाल करने के लिए अलग-अलग कई ऐप की आवश्यकता होगी।

इन युवाओं ने वाक़ई में एक ऐसे ऐप का निर्माण किया है जिसमें आत्मनिर्भर भारत की छटा देखने को मिलती है। यदि बुलंद इरादे, दूरदर्शिता और कठिन मेहनत के साथ लक्ष्य की सीढ़ी पर कदम रखा जाए तो सफलता हासिल होने से कोई नहीं रोक सकता।

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