December 5, 2021

स्वच्छ भारत मिशन : सच्चाई से परे है जमीनी हकीकत, आंकड़ों के बल पर चल रही योजना

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सरकार के तरफ से स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत पुरे देश मे जन जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को खुले मे शौच न करने और शौचालय का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लेकिन सच में यह योजना लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी है। ग्रामप्रधान और विभागीय अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति करके सरकार के सामने अपने को पाक साफ बनाने पर लगे हैं। जबकि आम जनता भी इस योजना में अपना सही सहयोग नहीं कर रही है। घर पर शौचालय होने के बाद भी लोग खुले मे शौच के लिए जा रहे हैं। इसमे ज्यादातर वैसे लोग हैं जिनके यहां शौचालय नाम मात्र का बना है, क्योंकि बहुत से बने शौचालयों में कही सही से गड्ढा नहीं खोदा गया है, तो कही छत नहीं है। शौचालय की नींव व दिवाल की जोडाई ऐसे हुई है कि, लोगों को उस शौचालय में शौच के लिए जाने से भय लगता है। एक बात और है कि अभी आम लोगों में सही रूप से जागरूकता न होने से भी यह हालात पैदा हुए हैं। ग्रामप्रधान व अधिकारी यह कहते हैं कि यह सहयोग राशि है. जबकि आम जनता शौचालय में अपना एक रूपया लगाना नहीं चाहती है। बड़ी बात यह भी है कि जो सहयोग राशि एक शौचालय को मिल रही है, अधिकारी व ग्राम प्रधान उसमे भी बंदरबांट करके काम कराये हैं। अधिकारियों के ऊपर जब सरकार का दबाव पड़ता है तो, अधिकारी ग्राम प्रधान पर दबाव बनाकर गांव को ओडीएफ करा लेते हैं। लेकिन यह केवल कागजी खानापूर्ति तक ही है, वास्तविकता इसके परे है।

क्यूँ रखा गया है शौचालय में सामान 
यदि ओडीएफ गांवो की बात की जाए तो वहां भी देखने को मिला कि शौचालय में लोग भूंसा, लकड़ी इत्यादि रखी है। इसके पीछे उनकी विवशता है कि शौचालय को सही से प्रयोग करने के लिए नहीं बनाया गया है। जिले के डीघ ब्लाक के अन्तर्गत केदारपुर गांव मे तो मेवालाल हरिजन ने शौचालय में गृहस्थी का सामान रखा है। इसका कारण यह है कि मेवालाल के पास रहने के लिए घर नहीं है और एक कमरा है भी तो उसकी दिवाल फटी है। इसीलिये घर का कुछ सामान शौचालय मे रखा है। दूसरी बात यह है कि मेवालाल के शौचालय के लिए गड्ढा नहीं बना था। इसीलिये शौचालय का प्रयोग शौच करने के लिए न करके मेवालाल सामान रखने के लिए कर रहा है।

वाहवाही बटोरने के लिए दिया जा रहा है धोखा 
प्रशासन झूठी वाहवाही के लिए आम नागरिक को बलि का बकरा बनाकर शासन के नजर में अपने को अच्छा साबित करना चाहता है, जो देश के लिए सही नहीं है। यदि इसी तरह के लापरवाही युक्त कार्य होते रहेंगे और अधिकारी फर्जी आंकडे पेश करके सरकार और आम जनता को धोखा देते रहेंगे, तो देश की दशा और खराब स्थिति मे पहुंच जायेगी। देश में न जाने कितने लोग हैं जो सरकार की योजनाओ मे फर्जी आंकडों के शिकार हुए हैं। सरकार की स्वच्छ भारत मिशन योजना को लापरवाही की भेंट चढ़ाकर सम्बन्धित लोग केवल खानापूर्ति को ही अपना प्रमुख अस्त्र मानते हैं, क्योंकि उन्हे मालूम है कि चाहे जो सरकार रहे काम तो हमारे ही माध्यम से जनता तक जाना है। जिसमे पुन: फर्जी आंकडों के जरिए सरकार और जनता को मूर्ख बनायेंगे। इसीलिये कुछ भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारी जान बुझकर सरकार की योजना को पलीता लगाते हैं और फर्जी आंकडेबाजी पेश करके स्वयं को ईमानदार व कर्मठ प्रस्तुत करते है।