February 23, 2024

स्मार्ट सिटी का स्मार्ट सच, जनता कह रही इट्स टू मच-

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*प्रकाशनार्थ*

 

*स्मार्ट सिटी का स्मार्ट सच, जनता कह रही इट्स टू मच !*

 

*हाय रे स्मार्ट सिटी, गुम हुई जनता की सिट्टी पिट्टी*

 

*- नारकीय स्थिति झेलने को विवश स्थानीय जनता व तीर्थ यात्री*

 

*- पक्का महाल में कई दिनों से बह रहे सीवर के पानी में हलकर जाने को मजबूर हुए लोग*

 

*- लाख शिकायतों के बाद भी झांकने तक नहीं पहुंचे स्मार्ट सिटी योजना के जिम्मेदार*

 

*- सीवर के पानी में चलकर बाबा दरबार तक जा रहे दर्शनार्थियों को हो रही परेशानी*

 

वाराणसी। जब से स्मार्ट सिटी के नाम पर बनी बनाई मजबूत गलियों को तोड़कर नया सीवर पाइप लाइन, वाटर पाइप और नया चौका गलियों में बिछाया गया है, तभी से पक्का महाल का सत्यानाश और यहाँ रह रहे लोगों के साथ ही दर्शनार्थियों व तीर्थ यात्रियों का जीना दुश्वार हो गया है। आए दिन सीवर ओवर फ्लो और उखड़ते पत्थरों के चलते लोग न केवल चोटिल हो रहे हैं बल्कि सीवर के पानी में हलकर मंदिर और अपने घरों तक जाने को विवश हैं। बीते कई दिनों से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर जाने के प्रमुख मार्ग मानमंदिर, त्रिपुरा भैरवी और विश्वनाथ गली नुक्कड़ पर सीवर चोक हो जाने से सीवर का गंदा पानी मार्ग में बह रहा है, जिसमें हलकर लोग गमनागमन को विवश हैं। लाख शिकायतों के बावजूद स्मार्ट सिटी योजना से जुड़े अधिकारियों पर कोई असर नहीं हो रहा है। सुनवाई तो दूर कोई मौका मुआयना करने तक नहीं आया। मजे की बात यह कि योजना से जुड़े इंजीनियरों को खुद नहीं पता कि फॉल्ट क्यों है और कहाँ से है और इसका निदान क्या होगा ?

स्मार्ट सिटी योजना के नाम पर निकृष्ट कार्ययोजना से आहत पक्का महाल निवासियों की एक अनौपचारिक बैठक रविवार को अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के महामंत्री और काशी तीर्थ पुरोहित सभा के कार्यवाहक अध्यक्ष व महामंत्री पं कन्हैया त्रिपाठी के आवास पर आहूत की गई। बैठक में आक्रोशित लोगों ने स्मार्ट सिटी योजना का काला सच उजागर करते हुए जमकर अपनी भड़ास निकाली। पं कन्हैया त्रिपाठी ने कहा कि दरअसल, बिना सोची समझी निर्माणनीति अपनाए, बिना किसी पूर्व में किए गए कार्यों का अवलोकन व अनुभव हासिल किए, इलाकाई लोगों से अनुभव लिए बिना और बगैर परफेक्ट इम्प्लेटेशन प्लान के समूची गलियों का निर्माण मनमाने तरीके से जैसे-तैसे कर दिया गया है। यहाँ तक कि स्थानीय कारीगरों की बजाए बाहर से आए इंजीनियरों से समूची गलियों में काम कराया गया है, जिन्हें वास्तव में न तो नाप-जोख की समझ है, न ही जल निकासी के लिए उचित ढलान का ही तजुर्बा है और न ही यहाँ की भोगौलिक स्थिति का ज्ञान। यही नहीं पेयजल पाइप लाइन और सीवर लाइन को समानांतर बैठा दिया गया है। जिससे लोगों के घरों में सीवरयुक्त पीने का पानी जा रहा है।

उन्होंने कहा गलियों में बिछाए गए चौके पूर्व के सामान्य ऊंचाई से बहुत ऊपर बिछाया गया है, जिससे बारिश और सीवर का पानी लोगों के घरों के अंदर पहुँच रहा है। जल निस्तारण के लिए नालियां भी नहीं बनाई गई हैं, जिससे पानी सड़क पर फैल जाता है।

वक्ताओं ने कहा कि सीवर इस कदर बनाया गया है कि हर दूसरे दिन पाइप जाम हो जाती है, जिससे सीवर ओवर फ्लो करने लगता है। इतना ही नहीं गलियों में भूमिगत बिछाए गए नए पेयजल पाइप लाइन भी कहीं न कहीं से रोज ही फट जाती है, जिससे हज़ारों लीटर पानी बहकर बर्बाद हो जा रहा है। गलियों में गुलाबी पत्थर के चौके इस कदर बैठाए गए हैं कि कोई ऐसा मुहल्ला नहीं जहाँ पर पत्थर उखड़ा न हो। जबकि स्मार्ट योजना के तहत हुए कार्य को अभी बमुश्किल एक वर्ष भी नहीं हुआ है। कूड़ा निस्तारण और साफ-सफाई का कार्य भी राम भरोसे ही चल रहा है।

श्री त्रिपाठी समेत अन्य वक्ताओं ने रोष और क्षोभ प्रकट करते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी का काम पुनः नए सिरे से कराकर इससे जनित तमाम समस्याओं का त्वरित निदान होना चाहिए, वरना जनता के बर्दाश्त की इंतेहा हो जाएगी और किसी भी वक्त उनका गुस्सा आंदोलन के रूप में फूटने में देर नहीं लगेगी।

बैठक में सर्वश्री कन्हैया त्रिपाठी, महेंद्र शर्मा, महेंद्र गुप्ता, छोटेलाल यादव, राजेश यादव, सुरेंद्र बनर्जी, नारायण शुक्ल, राजनाथ तिवारी, नितीन तिवारी, राजकुमार अवस्थी, बच्चे लाल, मुन्नू यादव, संतोष गुप्ता, चंदन बनर्जी, प्रतीक गुप्ता आदि सहित पक्का महाल के अन्य संभ्रांत नागरिक उपस्थित रहे।