October 31, 2020

सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यों के आयोग के गठन का आदेश दिया है – बर्नाड गौडी

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 उत्तर प्रदेश :-विकास दुबे एनकाउंटर से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यों के आयोग के गठन का आदेश दिया है | आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बी0एस0 चौहान करेंगे हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस शशिकांत अग्रवाल और यूपी के पूर्व डी0जी0पी0 के0एल0 गुप्ता भी आयोग के सदस्य होंगे |
कोर्ट ने कहा है कि आयोग एक हफ्ते में काम करना शुरू कर दे और इसके बाद 2 महीने में रिपोर्ट दे कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि आयोग को स्टाफ यूपी सरकार नहीं, बल्कि केंद्र सरकार मुहैया करवाएगी आयोग के अध्यक्ष अपनी इच्छा से भी स्टाफ का चयन कर सकते हैं सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में कहा गया था कि यूपी सरकार की तरफ से करवाई जा रही जांच से सच कभी सामने नहीं आ पाएगा क्यूंकि इस मामले में नेताओं, पुलिस और अपराधियों के गठजोड़ की तह तक पहुंचना जरूरी है |
सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए अपनी तरफ से आयोग के गठन का प्रस्ताव दिया था जिस पर यूपी सरकार ने बताया था कि उसने पहले ही पूर्व हाई कोर्ट जज शशिकांत अग्रवाल के नेतृत्व में एक आयोग का गठन कर दिया है | आज यूपी सरकार ने जस्टिस बी0एस0 चौहान और पूर्व डी0जी0पी0 के0एल0 गुप्ता का नाम सुझाया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी
याचिकाकर्ताओं ने जब यूपी सरकार की तरफ से आयोग के सदस्यों का नाम सुझाए जाने पर ऐतराज जताया तो चीफ जस्टिस एस0ए0 बोबड़े ने इसे खारिज करते हुऐ कहा “मैंने खुद जस्टिस चौहान के साथ काम किया है, शायद मैं भी उनका नाम आयोग के अध्यक्ष के तौर पर सुझाता”
अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत पड़ताल को जरूरी बताते हुए कहा, “इस मामले का सबसे अहम पहलू यही है कि गंभीर अपराध के दर्जनों मुकदमे दर्ज होने के बावजूद विकास दुबे जमानत पर जेल से बाहर कैसे था?”
कोर्ट ने साफ किया है कि आयोग बिखरु गांव में पुलिसकर्मियों की हत्या और बाद में विकास दुबे समेत 6 लोगों के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने से जुड़ी परिस्थितियों की जांच करेगा
कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि पुलिसकर्मियों की हत्या की जांच के लिए यूपी सरकार की तरफ से गठित एस0आई0टी0 अपना काम करती रहेगी
कोर्ट ने कहा कि, यूपी सरकार द्वारा गठित एस0आई0टी0 की जाँच पर अगर किसी याचिकाकर्ता को ऐतराज़ है, तो वो उसके ख़िलाफ़ हाई कोर्ट जा सकता है |