May 28, 2022

साइबर अपराधी साइबर थानों से लेकर डिजिटल विशेषज्ञों तक को हर मामले में छका दे रहे-

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*साइबर अपराधी साइबर थानों से लेकर डिजिटल विशेषज्ञों तक को हर मामले में छका दे रहे..!*

 

*क्या इन साइबर अपराधों का कोई अंत है..?*

 

 

*अपने पैसे पाने के लिए पीड़ितों को बैंकों और थानों के लगाने पड़ते चक्कर..!*

 

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हमारे देश सहित दुनियाभर में साइबर अपराध जिस तेजी से बढ़े हैं उससे सरकारों की नींद उड़ जाना लाजिमी है! शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता होगा जब किसी साइबर अपराध की खबर नहीं सुनाई पड़ती हो चाहे एक दूसरे देशों के प्रतिष्ठानों में सेंध लगाने का मामला हो या फिर बैंक खाते एटीएम मोबाइल बैंकिंग या सेंधमारी जैसे साइबर फर्जीवाड़ों से जुड़े अपराध हों या फिर ईमेल फेसबुक वाट्सऐप आदि में सेंधमारी के मामले हों साइबर अपराध समाज और सरकारों के लिए गंभीर समस्या के रूप में उभरे हैं!

 

देश में यह समस्या और तेजी से बढ़ रही है इस समस्या का सबसे गंभीर पहलू यह है कि साइबर अपराध करने वालों में नौजवानों की संख्या और भूमिका बड़ी होती जा रही है पढ़े लिखे नौजवान पेशेवेर भी इसमें शामिल हैं तो ऐसे भी किशोर और युवा भी हैं हैं जिन्होंने डिग्री स्तर तक की शिक्षा भी हासिल नहीं की है!

 

लेकिन सूचना तकनीक के मामूली जानकार ये अपराधी साइबर थानों से लेकर डिजिटल विशेषज्ञों तक को हर मामले में छका दे रहे हैं!

 

साइबर विशेषज्ञों और समाज शास्त्रियों को यह सोचने के लिए विवश कर रही हैं कि आखिर क्यों साइबर अपराध हमारे युवाओं को इस तरह अपनी ओर लुभा रहे हैं कि वे सही-गलत का फर्क नहीं कर पा रहे हैं हाल के दौर में साइबर अपराधों की फेहरिस्त पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि ओटीपी वन टाइम पासवर्ड और क्रेडिट कार्ड संबंधी जालसाजी ई-कामर्स फर्जी पहचान पत्र बनाने फर्जी मोबाइल नंबर हासिल करने फर्जी पता तैयार करने और चोरी के सामान की इंटरनेट के जरिए खरीद बिक्री आदि से लेकर कोई ऐसा साइबर फर्जीवाड़ा नहीं बचा है जिस पर इस दुनिया में सक्रिय अपराधियों ने हाथ न आजमाया हो! ऐसे मामलों में धरपकड़ के बाद भी इसकी रत्ती भर भी गारंटी नहीं है कि ऐसी डिजिटल धांधलियां जल्द ही रुक जाएंगी और जनता बेफिक्र होकर हर तरह का वर्चुअल लेनदेन खरीद फरोख्त या सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर पाएगी! सवाल है कि ऐसे हालात क्यों पैदा हुए हैं और क्या इन साइबर अपराधों का कोई अंत है?जब से महामारी ने दुनिया को अपनी गिरफ्त में लिया है साइबर अपराधियों की मानो लाटरी निकल आई है! चूंकि कोरोना काल में खरीदारी पढ़ाई से लेकर ज्यादातर आर्थिक गतिविधियां बरास्ता इंटरनेट कंप्यूटर नेटवर्क के जरिए संपन्न हो रही हैं ऐसे में उनमें सेंध लगाने के खतरे उतने ही बढ़ गए हैं!यहां बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर ऐसे साइबर अपराधों की रोकथाम कैसे हो हालांकि कानूनी उपाय इसका एक रास्ता है लेकिन बात सिर्फ कानून बनाने मात्र से नहीं बन रही है चूंकि साइबर अपराधी अब अंतरदेशीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरोह बना कर काम कर रहे हैं इसलिए खातों से उड़ाई गई रकम रातों रात एक राज्य से दूसरे राज्य या एक देश से दूसरे देश बाहर दूसरे ठिकानों पर चली जाती है!सबसे ज्यादा मुश्किल उन लोगों के लिए है जिन्हें बैंकिंग खरीदारी के वर्चुअल विकल्प मजबूरी में जैसे कि कोरोना काल में अपनाने पड़े हैं और जिन्हें इन साइबर उपायों की समझ व जानकारी बिल्कुल नहीं है ऐसे लोग एटीएम से पैसे निकालने के लिए अक्सर अनजान लोगों की मदद लेते हैं और उन्हें अपने एटीएम का पिन नंबर तक बता डालते हैं!जाहिर है डिजिटल प्रबंधों को जरूरी बनाने के साथ सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह कानून बनाने के साथ कड़ी सजाओं के प्रावधान भी करे और साइबर थानों में दर्ज हर शिकायत पर कार्रवाई सुनिश्चित करे अभी तो आलम यह है कि साइबर पुलिस हील-हुज्जत के बाद शिकायत दर्ज करने के अलावा कोई और काम नहीं करती! अक्सर पीड़ितों को खुद ही बैंकों और पुलिस थानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

 

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