November 30, 2020

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान,लखनऊ के चिकित्सकों को वैश्विक मान्यता- अजय मिश्रा

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प्रेस विज्ञप्ति ( 3 नवम्बर )

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान,लखनऊ के चिकित्सकों को वैश्विक मान्यता –

संयुक्त राज्य अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के Dr. John P A loannidis के नेतृत्व में तीन वैज्ञानिकों के दल ने 16 अक्टूबर 2020 को PLOS (पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंस) Biology नामक एक जनरल में एक अध्ययन प्रकाशित किया। इस अध्ययन में विश्व के 100000 वैज्ञानिकों और चिकित्सा विज्ञान, इंजीनियरिंग व अन्य मौलिक विज्ञान के क्षेत्र के सर्वोच्च 2% वैज्ञानिकों को सूचीबद्ध किया गया है। इस सूची में भारत के 15 वैज्ञानिक शामिल है, जिसमें लखनऊ शहर से 25 वैज्ञानिकों के नाम हैं। इन 25 वैज्ञानिकों में से 6 CDRI, 4 IITR, 3 KGMU, 3 लखनऊ विश्वविद्यालय व 3 संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक है। पी जी आई, लखनऊ के Gastroenterology विभाग के प्रोफेसर राकेश अग्रवाल सूची में सर्वोच्च स्थान पर हैं, जिनके 263 प्रकाशन हैं और विश्व में gastroenterology व hepatology के क्षेत्र में उनकी 490 रैंक है। डाक्टर अग्रवाल वर्तमान में JIPMER पुडुचेरी में प्रतिनियुक्ति पर निदेशक के पद पर कार्य कर रहे हैं। Hepatitis E जो भारत में बहुत सामान्य है, पर उनका काम विश्व में बहुत प्रशंसित है और हेपेटाइटिस पर वह विश्व स्वास्थ्य संगठन के साइंटिफिक एंड टेक्निकल एडवाइजरी कमिटी के सदस्य हैं तथा Immunization पर WHO की strategic advisory group of experts ( SAGE ) के भी सदस्य हैं।

संस्थान के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के दूसरे प्रोफेसर डॉक्टर उदय चंद्र घोषाल के 288 प्रकाशन है और विश्व की सूची में उनका 931 स्थान है। डाक्टर घोषाल को आतं संबंधी रोगों के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल है और वे Rome फाउंडेशन के सह अध्यक्ष भी है। Rome foundation विशेषज्ञों का समूह है जो आंतों के रोगों के प्रबंधन के लिए गाइडलाइंस बनाता है। डाक्टर अग्रवाल और डाक्टर घोषाल विश्व की सूची के 8 भारतीय गैस्ट्रोलॉजिस्ट में से दो श्रेष्ठ Gastroenterologists हैं।

संस्थान के सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी के प्रोफेसर डॉ वीके कपूर के 233 प्रकाशन हैं और सर्जरी के क्षेत्र में विश्व में इनकी 968 रैंक है। गॉलब्लैडर कैंसर व bile duct injury पर डाक्टर कपूर का कार्य अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त है।

सूची में एसजीपीजीआई के पूर्व विद्यार्थी डॉक्टर नैवेद्य चट्टोपाध्याय का भी नाम है जिन्होंने 1989- 1992 में प्रोफेसर गोडबोले के सक्षम मार्गदर्शन में अपना शोध कार्य पूरा किया और आज वह CDRI में कार्य कर रहे हैं। इनकी एंडॉक्रिनलॉजी और मेटाबॉलिज्म में विश्व की सूची में 201 रैंक है। अस्थि स्वास्थ्य और osteoporosis के क्षेत्र में शोध पर उनका विश्व स्तरीय कार्य है।

संस्थान के निदेशक प्रो आर के धीमन ने तीनों संकाय सदस्यों की उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त की है और अपनी इच्छा व्यक्त की है कि अन्य विभागों के संकाय सदस्य भी इस सूची में अवश्य ही अपना स्थान प्राप्त करेंगें।

पीजीआई चंडीगढ़ में लिवर के क्षेत्र में किये गये अपने उत्कृष्ट कार्य के आधार पर डॉक्टर धीमन भी इस सूची में स्थान रखते हैं। लिवर रोग जैसे liver transplant. लिवर सिरोसिस की जटिलताएं , जनसामान्य में होने वाला क्रॉनिक वायरल हेपेटाइटिस इत्यादि क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय है। Gastroenterology व Hepatology के 320 प्रकाशनों के साथ विश्व सूची में उनका 1154 स्थान है। उन्हें चिकित्सा के क्षेत्र के सर्वोच्च पुरस्कार Dr. B C Roy award से भी सम्मानित किया जा चुका है।