October 22, 2021

श्री राम ने किया अहंकारी रावण का अंत

Spread the love

MVD INDIA NEWS ●
Siyarammishra Varanasi
रामनगर ( वाराणसी ) राज मद व अहंकार में डूबे रावण का अंततः श्रीराम ने वध कर देवगणों व ऋषियों को रावण के राक्षसी राज से मुक्ति दिलाई । अवतारी प्रभु श्रीराम ने मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में अपनी मानवीय लीला से लोगों को यह विश्वास दिलाया कि धर्म की सर्वदा विजय व अधर्म का नाश होता है । रामनगर में चल रही विश्वप्रसिद्ध रामलीला में गुरुवार को रावण का रण क्षेत्र में मृत्यु शैय्या पर शयन और श्रीराम विजय की लीला का मंचन किया गया ।
विश्व प्रसिद्ध रामलीला के 26 दिन रावण की मूर्छा होती है और वह अपने महल में खुद को पाकर अपने सारथी को रणभूमि से भगाकर ले आने के लिए धिक्कारता है । अपने मायावी युद्ध के चलते श्रीराम के अनेक प्रहार के बावजूद जब रावण नहीं मरता है , तब विभीषण राम से रावण के नाभि कुंडु में अमृत होने की बात बताते हैं । बाणों की वर्षा के बीच श्रीराम रावण के हृदय में बाण मारकर उसे विचलित कर देते हैं । फिर एक बाण नाभि में मारकर रावण की इहलीला समाप्त कर देते हैं । रावण की मृत्यु के बाद विभीषण को दुखी देख श्रीराम रावण का अतिम संस्कार करने को कहते हैं । रात्रि में निर्धारित समय पर विभीषण पूरे विधि-विधान से रावण को मुखाग्नि देकर उसके शव को जलाते हैं । लीला में शव के प्रतीक रूप में रावण का विशाल पुतला जलाया गया । देवलोक व भूलोक में सर्वत्र खुशियां छा जाती हैं । संपूर्ण लंका भूमि श्रीराम के जयकारे से गूंज उठी तथा यहीं पर आरती के पश्चात लीला को विश्राम दिया गया ।
रामनगर थाना क्षेत्र में प्राचीन रामलीला के मंचन और दर्शनार्थियों की भीड़ को देखते हुए 19 से 23 अक्टूबर तक यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है । रोज शाम चार से रात्रि 12 बजे तक यह आदेश प्रभावी रहेगा । एसपी यातायात सुरेश चंद्र रावत ने MVD INDIA NEWS को बताया कि सामने घाट से शास्त्री चौक , रामनगर की तरफ जाने वाले सभी तीन और चार पहिया वाहनों को डायवर्ट कर सामनेघाट पुल से हरसेवानंद स्कूल ( रोड ) की तरफ जाएंगे । रामनगर चौक की तरफ से सामनेघाट पुल की तरफ आने वाले सभी वाहन को डायवर्ट कर टेंगरा मोड़ , विश्वसुंदरीपुल , डाफी होते हुए भेजा जाएगा ।
रामनगर दुर्ग में गुरुवार को विजयादशमी का पर्व राजसी शानो-शौकत व परंपरागत ढंग से मनाया गया । परंपरा के अनुसार अनंत नारायण सिंह दशमी तिथि लगने पर पूजन पर बैठे । चारों वेदों के चार विद्वान ब्राम्हणों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने विधि विधान से शस्त्र पूजा की । पूजन के पश्चात 36 वीं वाहिनी पीएसी के जवानों ने सलामी दी । तत्पश्चात अनंत नारायण सिंह का शाही दरबार लगा , जहां दरबार से जुड़े मुसाहिब साहबानों ने उनको नजराना पेश किया । राज परिवार से जुड़े महिलाओं ने उनकी नजर उतारी । उसके बाद दुर्ग में स्थित मंदिर में दर्शन पुजन के बाद शाम लगभग 4:30 बजे दुर्ग से सुसज्जित हाथियों पर पूरी शानो शौकत के साथ राजसी पोशाक में अनंत नारायण सिंह की सवारी निकली । सवारी के दुर्ग के बाहर आते ही उपस्थित जन समुदाय ने हर-हर महादेव का गगन भेदी जयघोष कर उनका अभिनंदन किया गया । अनंत नारायण सिंह ने भी हाथ जोडकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया । शाही सवारी बटाऊ वीर पहुंचने पर अनंत नारायण सिंह ने परंपरा के अनुसारशमी वृक्ष का पूजन व परिक्रमा किया ।
क्षेत्र के रामबाग गोकुलपुर की रामलीला में गुरुवार को अंगद-रावण संवाद का मंचन किया गया और इसमें अंगद ने रावण के अभियान को तोड़ दिया । श्रीराम के कहने पर सीता को ससम्मान वापस लौटने व प्रभु से युद्ध न करने प्रस्ताव लेकर अंगद लंका नगरी में पहुंचते हैं । वहां नगर में प्रवेश करते ही कुछ राक्षसों से उनका मल्ल युद्ध होता है । इसकी खबर जब रावण को होती है तो वह अंगद को दरबार में बुलाता है और कहता है तुम अपने पिता के हत्यारे का साथ दे रहे हो ।