January 21, 2022

वाराणसी: BHU के पूर्व VC प्रो जीसी त्रिपाठी को CBI ने बुलाया पूछताछ को।

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सिक्किम विश्वविद्यालय के वित्तीय अनियमितता की जांच से जुड़ा है मामला।

वाराणसी/इलाहाबाद. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अर्थ शास्त्र विभाग प्रो जीसी त्रिपाठी का विवादों से नाता टूटता नजर नहीं आ रहा। ताजा तरीन मामले में सीबीआई ने उन्हें सिक्किम विश्वविद्यालय के वित्तीय मामले की जांच के संबंध में पूछताछ के लिए उन्हें बुलाया है। इस बात की पुष्टि उन्होंने खुद ICN NEWS से बातचीत में की है।

बता दें कि 2015 में सिक्किम विश्वविद्यालय के वित्तीय अनियमितता के मामले की जांच मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कराई थी। इसके लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की गई थी। उस कमेटी के चेयरमैन थे बीएचयू के तत्कालीन कुलपति प्रो त्रिपाठी। बताया जा रहा है कि प्रो त्रिपाठी ने जांच के बाद सिक्किम विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति एमपी लामा को क्लीन चिट दे दी थी। कहा जा रहा है कि सीबीआई उस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है। ऐसे में प्रो त्रिपाठी को पूछताछ के लिए बुलाया है।

हालांकि कहा जा रहा है कि सिक्किम उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने प्रो. त्रिपाठी के खिलाफ कोलकाता में यह मामला दर्ज किया है। सीबीआई सिक्किम विश्व विद्यालय के तत्कालीन कुलपति रहे एमपी लामा के कार्यकाल के दौरान हुई कथित वित्तीय अनियमिताओं का परीक्षण कर रही है।

सूत्रों के अनुसार सिक्किम विश्वविद्यालय से दूरस्थ शिक्षा की संबद्धता और यूपी समेत अन्य राज्यों में इसके केंद्रों के संचालन से जुड़ा मामला है। बताया जा रहा है इस केंद्र का प्रधान कार्यालय प्रयागराज के जिस भवन में संचालित है, उसका संबंध प्रो त्रिपाठी से जुड़ा है। तब दूरस्थ शिक्षा केंद्रों की आड़ में बड़े पैमाने पर स्नातक स्तर की डिग्रियां बांटने का खेल हुआ था। इस मामले में प्रो. त्रिपाठी को 18 दिसंबर 2018 को सीबीआई की एंटी करप्शन शाखा के एसपी के समक्ष पेश होना था, लेकिन वह नहीं गए।

प्रो त्रिपाठी ने ICN NEWS से बातचीत में यह स्वीकार किया कि सीबीआई ने उन्हें पूछ ताछ के लिए बुलाया है। कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मुझे सिक्किम विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति के खिलाफ जांच के लिए गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया था। मैने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंप दी। उसके बाद वहां के तत्कालीन कुलपति प्रो लामा के विरोधी गुट के लोग कोर्ट गए थे जिस पर कोर्ट ने जांच का निर्देश दिया है।