October 27, 2020

वाराणसी में ये कैसा खेल, PM के संसदीय क्षेत्र में बड़ा फर्जीवाड़ा – बर्नाड गौडी

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शहर के एक नामी गिरामी बिल्डर की कम्पनी ने अपनी 25 हजार स्क्वायर फीट की जमीन  मॉर्गेज (बंधक ) जिसकी कीमत बैंक ने करीब 11 करोड़ रूपये आंका और उसके बदले कम्पनी को 5 करोड़ का सीसी /बीज़ी कम्पनी को बैंक ने दे दिया। इसके बाद यहीं से कम्पनी और बैंक अधिकारियों का खेल शुरू होता है। बताया जा रहा है कि बैंक ने मॉर्गेज (बंधक) रहते हुए उक्त जमीन जो कि गणेश बाग़ नर्सरी की जमीन जो लहरतारा के नाम से जाना जाता है, का प्लॉटिंग करके बिना बैंक के अनुमति के बेच दिया जाता है। मजे की बात तो यह है कि बेचे गए प्लाट में से दो प्लाट बैंक के अधिकारी ने अपने और अपने पुत्र के नाम से रजिस्ट्री करा लिया। प्लाट खरीदने वाले ग्राहकों ने अब वहां निर्माण भी शुरू करवा दिया है।

इस पूरे खेल की शुरुआत 2012 में शुरू हुआ।  जब दुर्गाकुंड निवासी ने दशाश्वमेध वार्ड के मौजा शिवपुरवा में करीब 50 हजार स्क्वायर फीट जमीन की रजिस्ट्री बिल्डर ने दो कम्पनी के नाम 25-25 हजार स्क्वायर फीट रजिस्ट्री करा लिया। जिसका दस्तावेज संख्या 1886 /12 और 743 /12 है। दोनों का आराजी नंबर एक ही है। बताया जा रहा है कि जिस बैंक अधिकारी ने उक्त जमीन से दो प्लाट रजिस्ट्री कराया है वह उस समय प्रॉपर्टी मॉर्गेज (बंधक ) किया गया था। तब बैंक ऑफ इंडिया  सोनारपुर शाखा में तैनात थे। अब सवाल यह उठता है कि यह कैसे हो सकता है कि मैनेजर साहब जो आज कल काशी अनाथालय के पास स्थित शाखा में तैनात हैं उनको ना मालूम हो जो प्लाट वो रजिस्ट्री करा रहे हैं वह जमीन उन्हीं के बैंक में मॉर्गेज (बंधक ) है। हालांकि नेशनल विज़न की तफ्तीश दौरान जब मामले का पोल खुलने लगा तो मैनेजर साहब यह रिपोर्ट प्रस्तुत कर रहे हैं कि जो प्रॉपर्टी उन्होंने लिया है वह प्रॉपर्टी दस्तावेज संख्या 1886 /12 से ख़रीदा गया  है , जबकि  बैंक में दस्तावेज संख्या 743 /12 मॉर्गेज है। अब समझने वाली बात यह है कि दस्तावेज संख्या 1886 /12 में भी 25 हजार  स्क्वायर फीट जमीन ख़रीदा गया था और 743 /12 में 25 हजार स्क्वायर फीट ख़रीदा गया था।  नेशनल विज़न के तफ्तीश में पता चला कि कुल 25 प्लाट जिसका रकबा 50 हजार स्क्वायर फीट है वो बेच दिया गया है। अब इससे हर कोई सहज अंदाजा लगा सकता है कि पूरे मामले में बड़ा गोलमाल है।

इस पूरे मामले के बाबत नेशनल विज़न ने वर्तमान में तैनात सोनारपुर ब्रांच के मैनेजर राम दुलार से बात की तो उन्होंने बताया कि बिल्डर की कम्पनी अनुराग आर्किट्रेक्च्लर एसोसिएट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा करीब एक करोड़ रूपये जमा करा दिया गया है और बाकी के लिए कम्पनी ने लिखित रूप से पत्र लिखकर कुछ समय मांगा है।  इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उक्त पूरे प्रकरण को जोनल कार्यालय रथयात्रा और लखनऊ स्थित जीएम को अवगत करा दिया गया है।  इसके बाद नेशनल विज़न ने जोनल कार्यालय में तैनात चीफ मैनेजर राजेश कुमार मौर्या से बात किया तो उन्होंने इस बाबत पूरी जानकारी नहीं दिया।
नेशनल विजन पूरे मामले के बाबत जब जीएम ब्रिज लाल से बात की तो उनका कहना है कि पूरा मामला संज्ञान में है और वाराणसी स्थित जोनल कार्यालय के अधिकारियों को मामले की जांच पड़ताल के लिए निर्देशित किया गया है। जांच रिपोर्ट आ जाने के बाद बैंक के नियमावली के अनुसार दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल यह है कि जब खुद पूरे मामले में स्थानीय अधिकारी की संलिप्तता आ रही है तो यहां हो रहे जांच के साथ कितना न्याय हो पायेगा।  यहां जरुरत है कि पूरे मामले की जांच उच्च स्तरीय जांच एजेंसी से कराई जाये ताकि पूरे मामले में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाये।