June 14, 2024

लिव इन रिलेशनशिप पर हाईकोर्ट का अहम फैसला- अजय मिश्रा

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प्रयागराज

 

लिव इन रिलेशनशिप पर हाईकोर्ट का अहम फैसला…

 

शादीशुदा का दूसरे के साथ संबंध रखना अपराध है,

 

अवैध संबंध को संरक्षण का आदेश देना अपराध को संरक्षण देने जैसा,

 

कोर्ट ने कहा है कि शादीशुदा महिला दूसरे पुरूष के साथ पति पत्नी की तरह रहती है तो इसे लिव इन रिलेशनशिप नहीं माना जा सकता,

 

जिस पुरूष के साथ रह रही है वह आईपीसी की धारा 494/495 के अंतर्गत अपराधी है,

 

कोर्ट ने कहा कि आदेश विधिक अधिकारों को लागू करने या संरक्षण देने के लिए जारी किया जा सकता है,

 

किसी अपराधी को संरक्षण देने के लिए नहीं जारी किया जा सकता है आदेश,

 

कोर्ट ने कहा कानून के खिलाफ अदालत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकती,

 

हाथरस ,ससनी थाना क्षेत्र की निवासी आशा देवी व अरविन्द की याचिका कोर्ट ने की खारिज,

 

जस्टिस एस पी केशरवानी और जस्टिस डॉ वाई के श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दिया आदेश,

 

याची आशा देवी महेश चंद्र की विवाहिता पत्नी है और दोनों के बीच तलाक नहीं हुआ है,

 

लेकिन याची अपने पति से अलग दूसरे पुरूष के साथ पति पत्नी की तरह रहती है,

 

कोर्ट ने कहा कि यह लिव इन रिलेशनशिप नहीं है वरन दुराचार का अपराध है,

 

याचिका में पति के परिवार वालों से सुरक्षा प्रदान की मांग की गई थी,

 

कोर्ट ने यह भी कहा कि शादीशुदा महिला के साथ धर्म परिवर्तन कर लिव इन रिलेशनशिप मे रहना भी अपराध है,

 

जिसके लिए अवैध संबंध बनाने वाला पुरूष अपराधी है,

 

ऐसे संबंध वैधानिक नहीं माने जा सकते,

 

कोर्ट ने कहा कि जो कानूनी तौर पर विवाह नहीं कर सकते उनका लिव इन रिलेशनशिप में रहना गलत है,

 

एक से अधिक पति या पत्नी के साथ संबंध रखना भी अपराध है,

 

*ऐसे लिव इन रिलेशनशिप को शादीशुदा जीवन नहीं माना जा सकता,*

 

*कोर्ट ने कहा ऐसे लोगो को कोर्ट से संरक्षण नही दिया जा सकता है।*