January 21, 2021

#रेलवे_का_फरमान_हितग्राही_परेशान – बीर बहादुर सिंह परिहार

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मध्यप्रदेश रीवा सिंगरौली रेल परियोजना पर रेलवे अधिकारियों द्वारा दिनांक 11-11-2019 को जारी परिपत्र में यह निर्देशित किया गया है कि दिनांक 11-11-2019 से पहले नौकरी हेतु प्राप्त आवेदन पत्रों पर ही विचार किया जाएगा उसके बाद के आवेदन पत्रों पर रोजगार हेतु विचार नहीं किया जावेगा।
इस प्रकार की तुगलकी फरमान जारी करने से पहले सक्षम अधिकारी द्वारा यह विचार नहीं किया गया कि क्या प्रभावित भूमियों का मुआवजा समय से दिया गया है?या अधिग्रहण की कार्यवाही पूर्ण कर ली गई है? इस प्रकार के जारी आदेश से पहले रेल मंत्रालय द्वारा स्वीकृत नहीं ली गई है जो पूर्णता विधि संगत नहीं है।साथ ही रेल परियोजना स्वीकृत के समय प्रभावित राजपत्र व आदेश में विरोधाभास है जिससे लाभान्वित होने वाले हितग्राहियों के स्वत्त्व एवं अधिकारों पर विपरीत असर पड़ रहा है और हितग्राही परेशान है। इस प्रकार की शर्तें राजपत्र में ही दर्शित होनी चाहिए थी जिससे निर्धारित समय सीमा से पूर्व ही आवेदन किया जाता।विसंगति यह भी है कि आवेदन पत्र के साथ जो आवश्यक दस्तावेज वांछित थे उन्हें मुआवजा भुगतान एवं भूअर्जन कार्यवाही से पहले कैसे प्राप्त किया जाता और आवेदन किया जा सकता था विचरण यह भी आवश्यक है कि क्या प्रकाशित राजपत्र से भी बड़ा अधिकार संबंधित अधिकारी को प्राप्त है जो ऐसा विसंगति पूर्ण आदेश जारी किया है।इन सब परिस्थितियों पर नजर डालने से यह प्रतीत होता है कि हितबद्ध हितग्राहियों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार व मनमानी पूर्ण कार्यवाही की जा रही है। यदि इस प्रकार के आदेश समाप्त नहीं किए जाते तो सभी हितग्राही अपने हित संरक्षण व स्वत्व के लिए आंदोलन का रास्ता अख्तियार करेंगे।
तेज बहादुर सिंह परिहार समाजसेवी सीधी