May 28, 2022

राजस्थान के आधा दर्ज़न अख़बारों की,असली प्रसार संख्या जानेगी सी बी आई-

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*‼️राजस्थान के आधा दर्ज़न अख़बारों की,असली प्रसार संख्या जानेगी सी बी आई‼️*🙋‍♂️

 

_*जागरूक पत्रकार महेश झालानी की शिक़ायत पर मामला दर्ज़*_🙄

 

_*राष्ट्रदूत सहित कई अख़बारों पर लटकी तलवार!*_🤭

 

_*फ़र्ज़ी प्रसार संख्या बताकर करोडों के वारे न्यारे करने का आरोप*_🤨

 

_*मुख्यमंत्री गहलोत ख़ुद भी इन अख़बारों को मौखिक रूप से ले चुके हैं आड़े!*_💁‍♂️

 

*✒️सुरेन्द्र चतुर्वेदी*

 

*फर्जी प्रसार संख्या बताकर करोड़ों रुपए के विज्ञापन राज्य व केंद्र सरकार से वसूलते रहने वाले अख़बारों की जांच अब सी बी आई तक पहुंच गई है ।राजस्थान के कई अख़बारों के विरुद्ध यह जांच शुरू की जा रही है। मशहूर पत्रकार महेश झालानी की शिक़ायत पर सी बी आई ने संज्ञान लेते हुए पी ई दर्ज़ कर ली है। इस प्राथमिक रिपोर्ट में भारत सरकार में डी ए वी पी के कई अधिकारी निशाने पर आ गए हैं ।*🤔

*राजस्थान के लगभग आधा दर्जन सुप्रसिद्ध अख़बारों की जांच होने से पत्रकार जगत में हड़कंप मच गया है।*😣

*महेश झालानी राज्य के जागरूक पत्रकार हैं और पत्रकारिता के साथ-साथ ब्लॉग्स लिख कर सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं ।वे ज्वलंत मुद्दे उठाकर जहां जन सहभागिता निभाते हैं ,वही अपनी पुख़्ता जानकारियों से सरकार के विभिन्न विभागों की नींद हराम करते रहते हैं।*🤪

*विगत दिनों राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राष्ट्रदूत अख़बार पर सीधा हमला बोला था और उसके प्रबंधकों पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने जो कहा उसे यहां उनकी ही भाषा में लिख रहा हूँ।*👇

*उन्होंने कहा था कि यह फ़र्ज़ी अखबार है। इसका कोई सरकुलेशन नहीं।फ़र्ज़ी सरकुलेशन के आधार पर यह राज्य सरकार से विज्ञापन लेता है। इस अख़बार की कोई विश्वसनीयता नहीं ।झूंठी और आधारहीन ख़बरें छापना इस का पेशा है ।*😨

*गहलोत पिछले दिनों भास्कर अख़बार पर भी नकारात्मक टिप्पणियां करते रहे हैं ।पूर्व ज़न संपर्क मंत्री डॉ रघु शर्मा भी भास्कर अख़बार पर अनर्गल बयान देते रहे थे*🙄

*पिंक सिटी प्रेस क्लब में प्रेस से मिलते हुए उन्होंने शराबी पत्रकारों और प्रशासनिक सेवाएं छोड़कर पत्रकारिता में आए जगदीश क़ातिल पर भी हास्यास्पद टिप्पणियां की थीं।*😨

*आपको याद होगा कि मैंने भी मुख्यमंत्री की जानकारियों और बयानों पर कई ब्लॉग्स लिखे थे ।*🙋‍♂️

*अब महेश झालानी की शिक़ायत पर सीबीआई ने आधा दर्जन अख़बारों को सम्मन भेजे हैं ।यदि शिक़ायत सही पाई जाती है तो इन अख़बारों पर कई तरह की रोक लगाई जा सकती है। इनका रजिस्ट्रेशन रद्द भी हो सकता है। सरकारी विज्ञापनों पर रोक भी लग सकती है ।*🤭

*पत्रकार झालानी ने अपनी शिक़ायत के साथ इन आधा दर्जन अख़बारों के बारे में जांच के लिए मुख्य बिंदु भी सीबीआई के आला अधिकारियों को सुझाए हैं ।*

*यदि इन 👇मुद्दों पर जांच की जाती है तो अधिकारी पता लगाएंगे कि—*

*1.अखबारों के पास स्वयं की प्रिंटिंग प्रेस है या ये दूसरी प्रेस में अपना अखबार प्रकाशित करवाते है । खुद की प्रेस है तो वह कब खरीदी गई तथा उसकी प्रकाशन क्षमता क्या है ? प्रति माह कितनी राशि का प्रिंटिंग पेपर ख़रीदा जाता है । उसका बिल मय जीएसटी के ।*

*2. प्रति माह कितनी स्याही व्यय होती है, उसका सम्पूर्ण विवरण और क्रय बिल मय जीएसटी के ।*

*3. प्रति माह हर संस्करण पर प्रिंटिंग प्रेस चलाने के लिए कितनी बिजली का व्यय होता है । बिजली बिल का भुगतान पूर्ण विवरण के साथ ।*

*4. कितने तकनीकी कर्मचारी नियुक्त हैं, उनकी नियुक्ति तथा प्रति माह भुगतान का विवरण ।*

*5. कितने संपादकीय कर्मचारी नियुक्त हैं तथा उनको प्रति माह भुगतान का विवरण । संपादकीय कर्मचारियों को मजिठिया और मनसिना आयोग के अनुसार वेतन तथा भत्ते देय हैं । पड़ताल करें कि कर्मचारियों को आयोग की सिफारिश के अनुसार वेतन और भत्ते दिए जा रहे हैं या नहीं ।*

*6. अखबारों का कार्यालय निजी है या किराये का । निजी है तो मिल्कियत के दस्तावेज़ । यदि किराये का है तो किरायानामा ।*

*7. प्रकाशित अखबारों के लिए नियुक्त एजेंट का नाम तथा देय कमीशन का विवरण ।*

*8. अखबार वितरण के लिए नियुक्त टैक्सी या वाहनों का विवरण ।*

*9. यदि अखबार अन्य प्रिंटिंग प्रेस में प्रकाशित हो रहे है तो उनका सम्पूर्ण ब्यौरा मय प्रकाशन क्षमता के । साथ ही प्रिंटिंग प्रेस को दिए जाने वाले भुगतान का विवरण ।*

*10. राज्य सरकर द्वारा कब हुआ जमीन का आवंटन और वर्तमान में आवंटित भूमि का उपयोग ।*

*11. जो समाचार पत्र वेतन आयोग के अनुसार तनख्वाह और भत्तों का भुगतान नही कर रहे है, उनके विज्ञापन पर प्रतिबंध ।*

*महेश झालानी की शिक़ायत पर फ़िलहाल जाँच शुरू ही हुई है।सम्मनों का जवाब आने पर ही कार्यवाही अंज़ाम तक पहुंचेगी।अब अंज़ाम क्या होगा यह ख़ुदा जाने।हमें जो मालूम था बता दिया।🤷‍♂️*