October 21, 2021

प्रयागराज से सिया राम मिश्र कि रिपोर्ट :

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सियाराम मिश्र

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प्रयागराज:कुंभ मेले में पहली बार शामिल हो रहे किन्नर संन्यासियों की रविवार को देवत्व यात्रा आन-बान-शान से निकली । बैंन्ड-बाजे के साथ ऊंट , घोड़ा , आकर्षक तरीके से सजे रथों पर सवार देशभर से जुटे किन्नर संन्यासियों की देवत्व यात्रा करीब 12 किलोमीटर का सफर तय कर छह घंन्टे में मेला शिविर पहुंची । सड़कों पर उनके दर्शन का आशीर्वाद लेने और स्वागत में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा और पूरे रास्ते फूल भी बरसाए गए ।
बहादुरगंज स्थित रामभवन चौराहा से आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में हर हर महादेव के उद्घोष के बीच देवत्व यात्रा सुबह साढ़े दस बजे शुरू हुई। इसमें पहले आचार्य महामंडलेश्वर ने रामभवन चौराहा स्थित मंदिर में भगवान शिव की पूजा की । तलवार लिए आचार्य महामंडलेश्वर सजे-धजे ऊंट पर सवार थे . त्रिशूल आदि लेकर 16 घोड़ों पर सवार तथा उनके पींछे आकर्षक ढंग से सजाए करीब दो दर्जन रथों पर सवार किन्नर सन्यासी हर किसी के आकर्षण का केन्द्र रहे । रामभवन चौराहा से जीवन ज्योति चौराहा और वहां से बाई का बाग होकर बैरहना चौराहा तक सड़क के दोनों ओर उमड़े श्रद्धालुओं ने किन्नर संन्यासियों का स्वागत कर उन पर फूल बरसाए । बैंन्ड की धुन पर बजते ‘ बम भोले – बम भोले , बम बम बम ‘ , सजे रहे भोले बाबा निराले घोड़े पे ‘ आदि भजनों से वातावरण शिवमय हो उठा ।
किला स्थिति मूल अक्षयवट का दर्शन दस जनवरी से शुरू हो जाएगा । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका श्रीगणेश करेंगे । सभी तैयारियां अंतिम दौर में हैं , जो आठ जनवरी को पूरी कर ली जाएंगी । मूल अक्षयवट के दर्शन के लिए किला में नए मार्ग का काम लगभग पूरा हो चुका है ।
प्रयाग कुंभ धर्म के क्षेत्र में अहम बदलाव का साक्षी बनने वाला है । यहां अखाड़ों की उपेक्षा का शिकार किन्नर संन्यासी श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा का हिस्सा बनने वाला हैं । जगतगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के प्रयास से किन्नर संन्यासी जूना अखाड़ा में विलय की तैयारी कर रहे हैं । इसको लेकर दोनों पक्षों में लंबे समय से वार्ता चल रही है। अब कागंजी खानापूर्ति भी शुरू हो गई है । किन्नर सन्यासी लंबे समय से 14 वें अखाड़ा के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं । लेकिन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद मान्यता नहीं दे रहा है । इससे किन्नर संन्यासी न पेशवाई निकाल पाते हैं , न ही शाही स्नान करते हैं । यही नहीं, उन्हें अखाड़ा के रुप में शिविर लगाने के लिए जगह भी नहीं मिलती है । किन्नर संन्यासी 2016 के माघ मेला में शिविर लगाना चाह रहे थे । लेकिन उन्हें जमिन व सुविधा नहीं मिली । इस बार भी शिविर लगने एवं पेशवाई निकालने में उन्हें दिक्कत हुई ।
सरकार के बाद अब सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी कुंभ का गुणगान और उसकी ब्रांडिंग करते दिख रहे हैं । मशहूर फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन मूलत: प्रयागराज के रहने
वाले हैं । 30-40 सेकेंड के चार आँडियो-विजुअल में उन्होंने प्रयागराज से अपने संबंध , वहां की खूबियों और कुंभ के अपने अनुभवों को साझा किया । है । अमिताभ बच्चन ने कहां है कि प्रयागराज का कुंभ ‘ मानवता का महोत्सव ‘ है । यह सिर्फ आस्था ही नहीं , विज्ञान से भी जुड़ा है ।नक्षत्रों के एक खास संयोग पर ही कुंभ का पर्व आता है । इस दिन संगम स्नान से शरीर , मन और आत्मा शुद्ध हो जाती है । नयी ऊर्जा का संचार होता है । यही वजह है कि यूनेस्को ने भी पिछले साल इसे ‘ मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर ‘ की संज्ञा दी है । अमिताभ बच्चन के अनुसार प्रयागराज कई मामलों में
खास है । लेटे हनुमानजी की मूर्ति सिर्फ प्रयागराज में ही है ।

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