October 29, 2020

पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के फिसड्डी निदेशक की दास्तान- अजय मिश्रा

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*पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के फिसड्डी निदेशक की दास्तान*

वाराणसी 15 अक्टूबर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के *सुधार की दिशा में लगातार प्रदेश के ऊर्जामंत्री, UPPCL के चेयरमैन यानी सबसे बडे बड़केबाबू,प्रबन्ध निदेशक पावर कार्पोरेशन ,पूर्वांचल डिस्कॉम के नवांगतुक प्रबंधनिदेशक सहित विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियो ने क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की दिशा में कार्य करना शुरू कर दिया है* सूत्रो की खबरों के अनुसार डिस्कॉम के *प्रबंध निदेशक अस्वस्थ होने के बावजूद लगातार डिस्कॉम के गेस्टहाउस से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पूर्वांचल के मर्ज को पकड़ कर पूरी रफ्तार में काम करते नजर आ रहे है* पर दूसरी ओर सबकी मेहनत पर डिस्कॉम के *निदेशक (वाणिज्य) सुधार की सारी तैयारियो पर पानी फेरते नजर आ रहे है प्रगति यात्रा समाचार के संवाददाता के खबरी सूत्रो के अनुसार पूरे पूर्वांचल में महोदय के कार्यकाल में बिलिग़ एजेंसियों द्वारा जमकर भ्रष्टाचार किये जाने की खबर है* परन्तु निदेशक महोदय उन कार्यदायी कम्पनियो से जमकर मलाई काटने और चांदी के जूते से मुंह सुजवा कर *पशुपति नाथ से शुरू यात्रा काशी के शिवालयों में आ कर भी समाप्त नही होती दिख रही है* वैसे जनाब बहुत ही धार्मिक है और आप इनको डिस्कॉम के कामो मे कम रूची लेते हुए परन्तु घूमते ज्यादा देखे जा सकते है महोदय ने जब *पूर्वांचल का कार्यभार ग्रहण किया उस वक्त पूर्वांचल में लगभग 11 लाख अनमिटर्ड उपभोक्ता थे परन्तु अपनी 2 वर्ष के करिश्माई कार्यकाल में मात्र 2 लाख मीटर लगवाने में सफल रहे आज भी 9 लाख मीटर उपभोक्ताओं के कनेक्शनों पर लटकने के लिये अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं* वैसे तो मध्याचल मे भी अनमीटर्ड मीटर है परन्तु उनकी *सख्या मात्र 3 लाख है* बात होती है कम की ना कि कमरा बन्द कर मुहं सूजवाने की आग लगेगी तभी तो धुआ निकलेगा जब मुह सुजवाया है तो दिखाई तो देगा ।

*ऊर्जा मंत्री एवं UPPCL के प्रबन्धन की सारी मेहनत को गंगा में तिलांजलि देते निदेशक*

संयुक्त संघर्ष समिति के निजीकरण के विरुद्ध चले आंदोलन में प्रदेश के ऊर्जामंत्री द्वारा कर्मचारियो को विश्वास में लेकर पूर्वांचल के सुधार पर जो रोडमैप तैयार हुआ *उसमे सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निदेशक (वाणिज्य) की होती है क्योंकि इसी जगह से राजस्व के आने की सम्पूर्ण देख रेख किया जाना निर्धारित है और यही सब कुछ गड़बड़ झाला है दाल मे कुछ काला नही अपितु पूरी दाल ही काली है* उपभोक्ता सेवा के नाम पर जब कार्यदायी कम्पनियो की सेवा लेने में निदेशक महोदय मशगूल रहेंगे है तो कम्पनी में सुधार की सोच बहुत दूर की कौड़ी है जिसपर प्रबन्धन को विचार करने की जरूरत है *जैसे अगर आप की बालटी मे ही छेद है तो आप कितना भी बाल्टी भर ले वो खाली ही रहेगी* वैसे ही अगर पूरा डिस्कॉम मेहनत करे लेकिन वाणिज्य विभाग आप का साथ नही दे रहा तो आप की मेहनत बेकार है *मंत्री चेयरमैन आदि सर के बल खडे हो जाए तोभी सुधार नही होगा क्यो कि चादी के जूते का यहा साम्राज्य जो स्थापित है तो चाहे मन्त्री जी चाहे लाख सर पटक ले चेयरमैन और प्रबन्ध निदेशक पावर कारपोरेशन कितनी ही चिठ्ठीया लिख ले जब हर जगह निदेशक वाणिज्य की शह पर काम होता है* और कार्यदायी संस्थाए समय समय पर महोदय की सेवा चाँदी के जूते से करती रहती है तो उन्हे डर किस बात का और महोदय भी काम से ज्यादा भुगतान पर अपना ध्यान ज्यादा केन्द्रित रखते है । वैसे भी कागजी घोडे दौडाने मे माहिर इस महारथी की वाणी तो इमरती से अधिक मीठी है *तभी तो जाने माने लेखक प्रताप नारायण मिश्र जी ने बात नामक अपने लेख मे लिखा है कि बात से हाथी पाईये बात से हाथी पाव* इसी विधा पर चलते है यह जनाब तभी तो कौन इनका क्या बिगाड सकता है । खैर

 

युद्ध अभी शेष है

 

*अविजित आनन्द प्रबंध संपादक और चन्द्र शेखर सिंह ब्यूरो चीफ प्रगति यात्रा मासिक समाचार लखनऊ*