November 28, 2020

पुलिस अधीक्षक बलरामपुर श्री देव रंजन वर्मा द्वारा कोतवाली देहात थाने में दी गयी तहरीर- अजय मिश्रा

Spread the love

*पुलिस अधीक्षक बलरामपुर श्री देव रंजन वर्मा द्वारा कोतवाली देहात थाने में दी गयी तहरीर*

 

 

 

सेवा में,

श्रीमान् प्रभारी निरीक्षक,

थाना-कोत0देहात, बलरामपुर।

 

 

विषय- *मृगेन्द्र उपाध्याय पुत्र रामफेर उपाध्याय निवासी भलुहिया मजरे कोइलिया थाना कोत0देहात जनपद बलरामपुर, उसके भाई दीपेन्द्र उपाध्याय तथा 05-06 अन्य अज्ञात लोगों के विरूद्ध सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर कार्यवाही किये जाने विषयक।*

 

 

महोदय,

*मेरा नाम देव रंजन वर्मा है। मैं 2011 बैच का सीधी भर्ती का भारतीय पुलिस सेवा का अधिकारी हूँ। वर्तमान में मैं जनपद बलरामपुर पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हूँ।*

 

*मेरे संज्ञान में यह आया है कि मृगेन्द्र उपाध्याय पुत्र रामफेर उपाध्याय निवासी भलुहिया मजरे कोइलिया थाना कोत0देहात जनपद बलरामपुर नाम का एक व्यक्ति और उसका भाई दीपेन्द्र उपाध्याय मुझे सार्वजनिक रूप से अपमानित करके न केवल मेरी मानहानि कर रहे हैं, बल्कि मेरे खिलाफ मुझे हत्या के अभियोग में फंसाने के लिए गहरी साजिश भी कर रहे हैं।* इस सम्बन्ध में मैंने तत्काल गहन पड़ताल की तो मुझे यह ज्ञात हुआ कि दिनांक 02 नवम्बर 2020 को बलरामपुर की सदर तहसील की गेट के सामने आदर्श प्रेस क्लब नामक एक संस्था के तत्वाधान में पत्रकारों की कतिपय माँगों को लेकर एक शान्तिपूर्ण और अहिंसक धरना चल रहा था। इसी दौरान वहाँ पर मृगेन्द्र उपाध्याय नाम का एक व्यक्ति मंच पर आमंत्रित किया गया और उसने वहाँ शान्ति से अहिंसकपूर्ण तरीके से धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों को भड़काने का प्रयास तो किया ही इसके साथ ही मेरे बारे में और पूरे बलरामपुर पुलिस विभाग के बारे में बहुत ही अमर्यादित और अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं, उसने मुझे मेरे शासकीय कर्तव्य से विरत करने के लिए अनुचित दबाव बनाने के लिए मुझे उसके और उसके भाई दीपेन्द्र उपाध्याय की हत्या करने की साजिश में मुझे फँसा देने की धमकी दी। इसके आगे भी उसने सवर्णों और दलित जातियों के बीच दुर्भावना और वैमनस्यता फैलाने के उद्देश्य से बहुत ही अपमानजनक टिप्पणियां कीं। उसके इस भड़काऊ भाषणबाजी से वहाँँ मंच पर उपस्थित कुछ लोग उग्र होकर तोड़-फोड़ और रोड जाम की योजना बनाने लगे, लेकिन फिर कुछ जिम्मेदार लोगों के समझाने से उन्हांने अराजक हरकत नहीं की और मृगेन्द्र उपाध्याय की योजना असफल हो गई।

*महोदय, उपरोक्त मृगेन्द्र उपाध्याय ने मेरे और सम्पूर्ण पुलिस विभाग के प्रति जो अशोभनीय, अमर्यादित और अपमानजनक भाषण सार्वजनिक रूप से एक मंच पर आकर किया था, उसको मैंने सुनकर लिखा है, उसका विवरण निम्नवत हैः*

 

 

मित्रों अभी गैसड़ी के मामले में एडीजीपी माननीय अरोड़ा साहब के आदेशों को घोलकर पी गया था, उस पीड़ित परिवार को चरित्रहीन बताने की कोशिश करने लगा। मीटिंग बुलाकर चरित्रहीन साबित करने का प्रयास किया गया। ऐसे भ्रष्ट अधिकारी को बचा दिया गया, तुम क्या जानते हो, बलरामपुर की पब्लिक तुम्हें छोड़ देगी। *मैं यह बताना चाहता हूँ कि देव रंजन वर्मा मैं मृगेन्द्र उपाध्याय खुले मंच से चैलेंज करता हूॅ कि मैं तुम्हें न्यायालय में देख लूॅगा, तुम्हारे गुण्डों को न्यायालय में देख लूॅगा, तुम्हारी वर्दी न्यायालय में उतरवाकर छोडूगा, तुम्हें पेंशन के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ेगी। मैं तुम्हें बताना चाहता हूॅ कि तू सम्भल जा।* छोटे छोटे मामले में हमारे सभी पत्रकार बन्धुओं की ………………. देव रंजन वर्मा एक-एक पुलिस वाले खूब फोटो खिंचवाये हैं लेकिन बड़े बड़े मामलों में पचपेड़वा में 50 लाख रूपया लूट कर चले गये। तुम और तुम्हारे पुलिस वाले इसके खिलाफ कार्यवाही गिरफ्तारी नहीं कर पाये। पचासों चोरियॉ हुई हैं कितने चोरियों में एफआईआर लिखे गये, कितने चोरियों के पर्दाफास किया गया। देव रंजन वर्मा मैं तुझको चैलेंज करता हूॅ कि तू सम्भल जा, तू भोली भाली जनता को लड़ाने का प्रयास मत कर। *तू जो साजिश का खेल खेल रहा है, तू जो सॉप छछुन्दर का खेल खेल रहा है, चूहा बिल्ली का खेल खेल रहा है, मैं तुझे बताने का प्रयास कर रहा हॅू। तुम्हें बताना चाहता हूॅ कि तू सम्भल जा, तू जो सुबह शाम लड़ाने का प्रयास कर रहा है तू अपने सभी थानों में सबसे ज्यादा एससी जाति की नियुक्तियॉ किया है, तू जो ब्राम्हड़ों के साथ उत्पीड़न किया है* मैं तुझसे यह जानना चाहता हूॅ कि जितने पुलिस उत्पीड़न हुए हैं, पब्लिक द्वारा जितनी शिकायत गयी है, तुमने कितने के खिलाफ कार्यवाही किया है। अगर फर्जी एफआईआर वापस नहीं हुई तो मैं तुम्हे न्यायालय में देख लूंगा। उसके साथ *मैं तुम्हे यह बताना चाहता हूॅ कि जो मेरी हत्या कराने की साजिश रच रहे हो, मेरे भाई की हत्या कराने का प्रयास कर रहा है देव रंजन वर्मा तू जो फर्जी एफआईआर दर्ज कर रहा है, मेरे भाइयों के खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज कर रहा है, मैं तेरे फर्जी एफआईआर व हत्या की साजिश को नाकाम करके छोडूॅगा, बस मैं इतना कहना चाहता हॅू कि तू अपनी आदतों में सुधार कर अपने पुलिसबल को समझा दे, नहीं तो तेरा बहुत बुरा हस्र होगा। मैं तुझे न्यायालय में घसीटकर छोडूगा।* बस इसी के साथ अपनी बाता समाप्त करना चाहता हूॅ। मित्रों मैं आप सभी लोगों को बताना चाहता हूॅ कि जब से देव रंजन वर्मा एसपी बलरामपुर बन कर आये हैं तब से फर्जी एफआईआरों की संख्या बढ़ी है, अपराध बढ़े हैं निर्दोषों को जेल भेजा गया है। दोषियों को पैसा लेकर छोड़ा गया है। मित्रों मैं देव रंजन वर्मा से पूछना चाहता हूॅ कि जब से आप बलरामपुर आये हैं तब से ……………….

 

महोदय, एक सार्वजनिक मंच पर खड़े होकर रोड के किनारे भीड़ के सामने माइक पर जिले के पुलिस अधीक्षक के बारे में यह कहना कि देव रंजन वर्मा मैं मृगेन्द्र उपाध्याय खुले मंच से चैलेंज करता हूँ कि मैं तुम्हें न्यायालय में देख लूँगा, तुम्हारे गुण्डों को न्यायालय में देख लूँगा। तुम्हारी वर्दी न्यायालय में उतरवाकर छोडूँगा। तुम्हें पेंशन के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ेगी।

*महोदय, कई सालों की मेहनत के बाद मैं पूरे भारत की सबसे प्रतिष्ठित सेवाआें में से एक भारतीय पुलिस सेवा में 2011 में चयनित हुआ। मैंने विभिन्न पदों पर अलग अलग जनपदों में कार्य किया है। बलरामपुर से पूर्व मैं चार जनपदों का पुलिस अधीक्षक रह चुका हूँ, किन्तु इस मृगेन्द्र उपाध्याय नाम के व्यक्ति ने मुझे सार्वजनिक रूप से बहुत अपमानित किया है। इसके लिए मैं बहुत क्षुब्ध व व्यथित महसूस कर रहा हूँ। मेरे आत्मसम्मान को बहुत चोट पहुँची है। मुझे बहुत ही दुख हो रहा है कि मेरे नौ साल की सेवाकाल में ये पहली बार हुआ है कि एक अपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति ने अपने निजी स्वार्थ के लिए मेरी भारतीय पुलिस सेवा की वर्दी, जो मुझे भारत के संविधान ने दी है, उसको उतरवा लेने की धमकी दी है और यही नहीं इस व्यक्ति की मेरे प्रति दुर्भावना की पराकाष्ठा तो ये है कि मेरे रिटायरमेंट के बाद मेरी जिस पेंशन से मैं अपने और अपने परिवार का जीवन यापन करूँगा, उसके लिए भी ये व्यक्ति मुझे दर-दर की ठोकरें खाने के लिए धमकी दे रहा है।* सार्वजनिक रूप से मेरा अपमान व मानहानि करने के साथ ही साथ मृगेन्द्र उपाध्याय नाम के इस व्यक्ति ने अपने फर्जी पत्रकार भाई दीपेन्द्र उपाध्याय के माध्यम से मृगेन्द्र उपाध्याय की *इस अपमानजनक अमर्यादित और मेरी मानहानि करने वाली वीडियो को सोशल मीडिया जैसे व्हाट्सएप्प, यू-ट्यूब आदि पर वायरल कर दिया, जिससे इस व्यक्ति के द्वारा न केवल मेरा अपमान और मानहानि स्थानीय स्तर पर की गयी, बल्कि इंटरनेट व सोशल मीडिया के माध्यम से पूरी दुनिया में मुझे अपमानित करके हँसी का और अपमानजनक टिप्पणियों का पात्र बना दिया। मैं भारतीय पुलिस सेवा का एक अधिकारी हूँ, और मेरे ऊपर मिथ्या व अनर्गल आरोप लगाकर व अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने के कारण इस मानहानि के लिए मृगेन्द्र उपाध्याय पर मानहानि का मुकदमा भी दायर करूँगा।*

मृगेन्द्र उपाध्याय की कुटिल और कलुषित बुद्धि ने पुलिस विभाग जैसे अनुशासित बल में विद्रोह फैलाने का भरसक प्रयास किया। पुलिसबल एक अनुशासित बल है और शासन के दिये गये निर्देशों के अनुसार इसमें काम होता है। थानों पर जो भी प्रभारी निरीक्षकों या थानाध्यक्षों की तैनाती की जाती है, वह शासन के निर्देशों के अनुसार की जाती है, किन्तु पुलिस विभाग जैसे अनुशासित बल में मृगेन्द्र उपाध्याय ने सवर्ण ब्राम्हण अधिकारियों व दलित जाति के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच जातीय विद्वेष फैलाकर उनको विद्रोह करने के लिए उकसाया और कहा कि तू जो साजिश का खेल खेल रहा है, तू जो साँप छछुन्दर का खेल खेल रहा है, चूहा बिल्ली का खेल खेल रहा है, मैं तुझे बताने का प्रयास कर रहा हूँ। तुम्हें बताना चाहता हूँ कि तू सम्भल जा, तू जो सुबह शाम लड़ाने का प्रयास कर रहा है, तू अपने सभी थानों में सबसे ज्यादा एससी जाति की नियुक्तियाँ किया है, तू जो ब्राम्हणों के साथ उत्पीड़न किया है।

महोदय, जनपद बलरामपुर पुलिस के वरिष्ठतम अधिकारी के प्रति इस प्रकार की तू-तू वाली भाषा बेहद ही अमर्यादित और अशोभनीय है।

महोदय, मृगेन्द्र उपाध्याय पुलिस विभाग में विद्रोह फैलाने के उद्देश्य में काफी हद तक सफल भी हो गया। मुझे गोपनीय रिपोर्ट प्राप्त हुई है कि मृगेन्द्र उपाध्याय के इस विभाजनकारी, कुटिल व जातीय विद्वेष फैलाने वाले भड़काऊ भाषण की वजह से बलरामपुर पुलिस के कतिपय पुलिस अधिकारियों/कर्मचारी इस बारे में चर्चा कर रहे थे कि 14 थानों में से मात्र 05 ही थानों पर ब्राम्हण क्यों पोस्ट हैं। ब्राम्हणों को कम से कम 50 प्रतिशत थानों पर पोस्ट करना चाहिए। ब्राम्हण सभी जातियों में सर्वश्रेष्ठ हैं और मृगेन्द्र उपाध्याय ने सही कहा और हम लोग ब्राम्हणों के सम्मान के लिए किसी भी हद तक लड़ाई करेंगे और जरूरत पड़ी तो कोई भी रास्ता अख्तियार करेंगे। कुछ दलित जातियों के अधिकारियों/पुलिसकर्मियों के बीच यह भावना भर गयी कि हजारों वर्षों से हमलोगों को जानवरों की तरह माना जाता था और व्यवहार किया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है और अगर कोई भी ब्राम्हण अधिकारी दलित जाति के अधिकारी/कर्मचारी का उत्पीड़न करने की कोशिश करेगा, तो हमलोग उसको अच्छे से सबक सिखा देंगे।

महोदय, ये पुलिस विभाग जैसे अनुशासित बल के लिए बहुत बड़ा खतरा है, क्योंकि मृगेन्द्र उपाध्याय के जातीय विद्वेष फैलाने वाले भाषण की वजह से पुलिसकर्मियों में विद्रोह की भावना घर करने लगी है। *महोदय, मृगेन्द्र उपाध्याय और दीपेन्द्र उपाध्याय ये दोनों ही भाई अपराधिक प्रवृत्ति के और बहुत ही मनबढ़, गुण्डे टाइप के व्यक्ति हैं, जिनके ऊपर जनपद बलरामपुर में अलग-अलग थानों में बलवा, मारपीट, गुण्डा-गर्दी, पुलिस पर हमला, अवैध वसूली, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी आदि गम्भीर अपराध पाये गये और उनमें इन दोनों के खिलाफ चार्जशीट भी लगी है। महोदय, ये मृगेन्द्र उपाध्याय अपने आप को वकील बताता है, जबकि मेरे संज्ञान में यह आया है कि इसको बार काउंसिल से निकाल दिया गया है या एक बार पहले निष्कासित किया जा चुका है। ये दोनों भाई बहुत ही गुण्डे, दबंग और मनबढ़ किस्म के अपराधी हैं। दीपेन्द्र उपाध्याय एक फर्जी पत्रकार के रूप में चिन्हित किया गया है, जो कि झाँसा देकर लोगों को डरा धमकाकर उनसे अवैध वसूली करता है। ये दोनों ही भाई आम जनता को तो छोड़िए, पुलिस विभाग के वरिष्ठ से वरिष्ठ अधिकारियों तक को धमकाते डराते हैं और उनके प्रति गाली गलौज और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। उनके ऊपर झूठे आरोप लगाकर अपने अवैध काम करवाने के लिए दबाव बनाते हैं।* बहुत बार पुलिसकर्मी ये फर्जी पत्रकार और गुण्डे तथाकथित वकील की धमकियों से डर कर या तो पैसा देकर अपनी जान छुड़ाते हैं या फिर इन दोनों के बताये हुए अवैध कामों को पूरा करके किसी तरह से अपने आप को इन दोनों षडयन्त्रकारी, कुचक्री भाइयों से बचाते हैं। ये दोनों भाइयों के दहशत का आलम यह है कि इनके खिलाफ कोई भी कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं करता है। *कुछ दिन पहले एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके अन्दर यही फर्जी पत्रकार दीपेन्द्र उपाध्याय अपने कुछ साथियों के साथ एक जमीन पर अबैध कब्जा करने पहुँचा और वहाँ एक बूढ़े व्यक्ति को बहुत बुरी तरह से जमीन पर गिराकर लातों से मारने लगा। उस बूढ़े व्यक्ति ने किसी तरह वहाँ से भागकर अपनी जान बचाई, वरना दीपेन्द्र उपाध्याय लातों से मारकर उस बूढ़े अशक्त व्यक्ति की हत्या कर देता।*

*मृगेन्द्र उपाध्याय व दीपेन्द्र उपाध्याय एक गिरोह बनाकर सीधे सादे लोगों से अवैध उगाही और उनकी भूमि पर अवैध कब्जे के कलुषित कार्य में लिप्त हैं, जिसमें ये पत्रकारिता और वकालत जैसे पुनीत और मर्यादित पेशे का लबादा ओढ़कर अपनी अपराधिक मंसूबों को अंजाम दे रहे हैं।* दीपेन्द्र उपाध्याय द्वारा उस बूढ़े और अशक्त व्यक्ति को गिराकर बुरी तरह से लातों से मारने की वीडियो और उसकी फोटोग्राफ संलग्न है, ताकि आपको इस दीपेन्द्र उपाध्याय और मृगेन्द्र उपाध्याय की गुण्डागर्दी का अनुभव हो सके।

महोदय, दीपेन्द्र उपाध्याय और मृगेन्द्र उपाध्याय दोनों इतने कुटिल, शातिर और अपराधिक मानसिकता के हैं कि ये जानते हैं कि *जब तक विभिन्न स्तरां के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर अनुचित दबाव नहीं बनाया जायेगा, तब तक वो अपने अवैध धन्धों में सफल नहीं हो पायेंगे। इस क्रम में मृगेन्द्र उपाध्याय ने थाना कोत0नगर में तैनात उ0नि0 कृष्ण कुमार को फोन करके ये आरोप लगाया कि उसने एक मुकदमे में मृगेन्द्र उपाध्याय के मुवक्किल से पैसा ले लिया है। जब इस आरोप से क्षुब्ध होकर विवेचक उ0नि0 कृष्ण कुमार ने इसका प्रतिकार किया, तो उसने फोन पर उ0नि0 कृष्ण कुमार को बहुत ही गन्दी गन्दी माँ-बहन की गालियाँ दीं।* इस कॉल रिकार्डिंग की ऑडियो क्लिप प्रार्थनापत्र के साथ संलग्न है। वार्तालाप का पूरा विवरण निम्नवत हैः

 

*मृगेन्द्र उपाध्याय-हैल्लो अरे कृष्ण कुमार दरोगा बोलथये आप,*

 

*उ0नि0 कृष्ण कुमार-बोल रहा हूँ,*

मृगेन्द्र उपाध्याय-अरे संजय के घरे गयो तो आप 10000/-रूपया काहे मांगे लाग्यो,

किससे

मृगेन्द्र उपाध्याय-संजय के घर जब गयो जब आप शनिवार के गये तब 10000/-रूपयो काहें मागे लागो,

उ0नि0 कृष्ण कुमार- किससे मागा,

मृगेन्द्र उपाध्याय-नानबाबू से,

उ0नि0 कृष्ण कुमार-दिमाग ठीक है तुम्हारा तुम्हें शरम नहीं आ रही है, तुम किस तरह की बात कर रहे हो, दिमाग ठीक है तुम्हारा

 

*मृगेन्द्र उपाध्याय-मैया चोद डारब तेरी मैया की भोसड़ा चोदों बात कर अपने दामाद से मादरचोद।*

 

महोदय, आप देख सकते हैं कि इस मृगेन्द्र उपाध्याय में भारतीय संविधान और भारतीय कानून को लेकर किसी भी प्रकार कोई सम्मान नहीं है। *एक विवेचक उपनिरीक्षक को इतनी गन्दी गन्दी गालियाँ देना, इसकी कुटिल, षडयन्त्रकारी और अनुचित दबाव बनाकर अवैध काम करवाने में सक्षम बुद्धि की चाल है।*

 

*मृगेन्द्र उपाध्याय और दीपेन्द्र उपाध्याय जिन भी पुलिस अधिकारियों के साथ इस तरह के दुर्व्यहार करते हैं, उसकी ऑडियो वीडियो रिकार्डिंग अपने पास रखते हैं और अपने विपक्षी को दिखा और सुनाकर उनके ऊपर ये धौंस जमाते हैं कि जब पुलिस के बड़े बड़े अधिकारी हमारा कुछ न बिगाड़ सके, जबकि हमने इतनी गालियाँ दीं, तो तुम्हारी क्या औकात है और इसी षडयन्त्र से इन दोनों भाइयों की अवैध उगाही का धन्धा खूब फल-फूल रहा है।*

 

अभी हाल ही में *जनपद बलरामपुर के थाना कोतवाली नगर के प्रभारी निरीक्षक श्री राजित राम को दीपेन्द्र उपाध्याय ने ब्लैकमेल करके उनसे अवैध वसूली करना चाही और जब श्री राजित राम ने मना किया तो दीपेन्द्र उपाध्याय ने पहले तो उनको ये धमकी दी कि वो लगभग एक साल पुराने प्रकरण में जिसमें राजित राम को आरोपित किया गया है, वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर देगा, क्योंकि वह एक पत्रकार है (हकीकत ये है कि उक्त प्रकरण में एक साल पहले ही क्षेत्राधिकारी स्तर से जाँच पूर्ण हो गयी थी, जिसमें लगाये गये आरोप निराधार पाये गये थे।) इस पर भी दलित जाति के पुलिस अधिकारी श्री राजित राम जब पैसा देने को तैयार न हुए, तो जाति सूचक गन्दी गन्दी गालियाँ दीं और ये कहा कि तुमको मैं इस थाने से हटवाकर और निलम्बित करवाकर ही छोडूँगा।* महोदय, दीपेन्द्र उपाध्याय की मनबढ़ई और गुण्डागर्दी आप स्पष्ट देख सकते हैं, लेकिन फिर भी मृगेन्द्र उपाध्याय और दीपेन्द्र उपाध्याय की कुटिल षडयन्त्रकारी बुद्धि से हटो-बचो की नीति अपनाते हुए पुलिस विभाग के अधिकारी, कर्मचारी अपनी जान बचाये रहे। आम निरीह जनता और पुलिस विभाग के विभिन्न अधिकारियों पर अपनी गुण्डागर्दी और धौंस जमाकर उनसे अवैध वसूली और अवैध काम करवाने के मंसूबे इन दोनों भाइयों के इतने बढ़ गये हैं कि मृगेन्द्र उपाध्याय और दीपेन्द्र उपाध्याय ने साजिश करके खुले मंच से मेरा (पुलिस अधीक्षक बलरामपुर) और क्षेत्राधिकारी उतरौला का भी अपमान और मानहानि की है। *भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और जनपद बलरामपुर के पुलिस विभाग के वरिष्ठतम अधिकारी को खुले मंच से वर्दी उतरवा लेने और पेंशन के लिए दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर कर देने के लिए धमकी दी।* इस तथाकथित वकील मृगेन्द्र उपाध्याय ने मेरे जैसे वरिष्ठ और भारतीय सेवा के पुलिस अधिकारी पर अनुचित और अवैध रूप से दबाव बनाने की साजिश कीं, ताकि मृगेन्द्र उपाध्याय और दीपेन्द्र उपाध्याय के अनुचित कामों में मैं कोई बाधा न बनूँ और थानों से उनकी अवैध वसूली का काम और अवैध कार्य कराने का धन्धा निर्बाध रूप से चलता रहे। इसके लिए मेरे ऊपर ये झूठा, अनर्गल, षडयन्त्रकारी, दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाया है कि मैं उसकी हत्या का प्रयास कर रहा हूँ। मृगेन्द्र उपाध्याय ने कहाः मैं तुम्हे यह बताना चाहता हूॅ कि जो मेरी हत्या कराने की साजिश रच रहे हो, मेरे भाई की हत्या कराने का प्रयास कर रहा है देव रंजन वर्मा तू जो फर्जी एफआईआर दर्ज कर रहा है, मेरे भाइयों के खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज कर रहा है, मैं तेरे फर्जी एफआईआर व हत्या की साजिश को नाकाम करके छोडूॅगा, बस मैं इतना कहना चाहता हॅू कि तू अपनी आदतों में सुधार कर अपने पुलिसबल को समझा दे, नहीं तो तेरा बहुत बुरा हस्र होगा।

*महोदय, मैं इस बात से बहुत आश्चर्यचकित भी हूँ और आहत हूँ। क्या मैंने भारतीय पुलिस सेवा लोगों की हत्या करवाने के लिए ज्वाइन की थी? मेरे 09 वर्ष के कार्यकाल में इस तरह का निराधार, षडयन्त्रकारी, कुचक्री ये पहला व्यक्ति है, जो इस तरह के झूठे आरोप मुझपर लगा रहा है। अभी तक मेरे नेतृत्व में हजारों शातिर एवं कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार कर मा0न्यायालय के समक्ष पेश किया जा चुका है। मैं भारतीय संविधान के आदर्शो में बँधा हुआ एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी हूँ, जिसके नेतृत्व में 2000 से भी ज्यादा पुलिसकर्मी कार्यरत हैं। मृगेन्द्र उपाध्याय जैसा शख्स जो शायद एक या दो बार मुझसे कभी कार्यालय में मिला होगा, मैं उसकी हत्या का षडयन्त्र क्यों करूँगा, इसका कोई अन्य कारण समझ में नहीं आता, बस एक कारण समझ में आता है कि ये दोनों कुटिल और कुचक्री भाई मृगेन्द्र उपाध्याय व दीपेन्द्र उपाध्याय मुझे हत्या, हत्या के प्रयास या किसी अन्य गम्भीर अपराध में फँसाना चाहते हैं, ताकि इनकी पूरे पुलिस विभाग पर धौंस जमे और अपने अवैध धन्धे व अवैध उगाही निर्बाध तरीके से करें। मैं एक पुलिस अधिकारी हूँ और सैकड़ों मुकदमों में मैंने देखा है कि किस प्रकार से कुटिल और अपराधी प्रवृत्ति के लोग अपने विपक्षियों को फँसाने के लिए अपने शरीर पर किसी आग्नेयास्त्र या अन्य घातक हथियार से कृत्रिम रूप से चोटें बनाकर हत्या के प्रयास का मुकदमा लिखा देते हैं या फिर किसी व्यक्ति की अप्राकृतिक मृत्यु होने पर कई कई निर्दोष लोगों को उनके हत्यारे के रूप में नामजद कर देते हैं या अन्य गम्भीर अपराधों में फर्जी फँसा देते हैं।*

महोदय, ये दोनों कुचक्री भाइयों की षडयन्त्रकारी बुद्धि इतनी शातिर है कि सबसे पहले इन दोनों से साजिश करके मृगेन्द्र उपाध्याय द्वारा सार्वजनिक रूप से भीड़ के सामने यह घोषणा कर दी की पुलिस अधीक्षक बलरामपुर मृगेन्द्र उपाध्याय और दीपेन्द्र उपाध्याय की हत्या की साजिश कर रहे हैं। उसके बाद दीपेन्द्र उपाध्याय ने षडयन्त्र करके मृगेन्द्र उपाध्याय के भाषण की इस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया और इस प्रकार से बहुत ही शातिराना तरीके से इन दोनों षडयन्त्रकारी कुचक्री भाइयों ने मेरे खिलाफ मिथ्या साक्ष्य गढ़ा और इस प्रकार से गढ़ा कि ये लोग मुझे हत्या या हत्या के प्रयास या अन्य गम्भीर अपराध के षडयन्त्र में फंसाकर मुझे मृत्यु दण्ड या आजीवन कारावास की सजा करवाने में सफल हो जायें।

महोदय, जनपद बलरामपुर में मुझे एक वर्ष पाँच माह के लगभग की अवधि पुलिस अधीक्षक बलरामपुर के रूप में व्यतीत हो चुकी है। लेकिन *इन दोनों कुटिल कुचक्री और षडयन्त्रकारी भाइयों के द्वारा मुझे दबाव में लेने के लिए और इसके परिणामस्वरूप पूरी बलरामपुर पुलिस को दबाव में लेकर अपने अवैध धन्धों और अवैध उगाही को निर्बाध रूप से संचालित करने के लिए जिस प्रकार से मेरे खिलाफ सोची समझी रणनीति बनाकर मेरी नौकरी, मेरे परिवार और मेरे जीवन को नष्ट करने के लिए जो षडयन्त्र का ताना-बाना बुन रहे हैं, उससे अब मुझे भी भय व दबाव महसूस होने लगा है। ये दोनों षडयन्त्रकारी व कुचक्री भाई इस हद तक दबंग, मनबढ़ और गुण्डे हो चुके हैं कि ये अपने कलुषित उद्देश्यों को पूरा करने के लिए मुझे नुकसान पहुँचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।*

महोदय, उपरोक्त प्रकरण में मृगेन्द्र उपाध्याय, दीपेन्द्र उपाध्याय और मृगेन्द्र उपाध्याय के साथ मंच पर बैठे 05-06 अन्य अज्ञात व्यक्तियों के विरूद्ध एफ0आई0आर0 दर्ज करके कठोर कार्यवाही करने की कृपा करें।

संलग्नकः यथोपरि।

 

 

 

(देव रंजन वर्मा)

पुलिस अधीक्षक

बलरामपुर।