November 27, 2021

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को 10 साल व बेटी मरियम को 7 साल की सज़ा

Spread the love

पाकिस्तान की कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को 10 साल की और उनकी बेटी मरियम को भ्रष्टाचार के मामले में 7 साल की सजा सुनाई है व नवाज़ शरीफ पर 73 करोड का जुर्माना व उनकी बेटी पर 18 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया है, गौर करने वाली बात है कि यह फैसला 25 जुलाई को होने वाले आम चुनावों से कुछ दिन पहले सुनाया गया है, जाहिर सी बात है कि कोर्ट के इस फैसले से वहां सियासी गर्मी भी बढ़ सकती है,

जानिए पूरा मामला
पनामा पेपर्स के नाम से लीक हुए दस्तावेजों को सामने लाने में मुख्य भूमिका अमेरिका स्थित एक एनजीओ खोजी पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय महासंघ (ICIJ) की है. आईसीआईजे ने दस्तावेजों की गहरी छानबीन की. आईसीआईजे को किसी अज्ञात सूत्र ने इन दस्‍तावेजों को उपलब्‍ध कराया था. जांच में नवाज शरीफ के अलावा कई फिल्मी और खेल जगत की हस्तियों समेत करीब 140 लोगों की संपत्ति का भी खुलासा हुआ था. भारत से भी कुछ लोगों के नामों का जिक्र पनामा पेपर्स में किया गया था।

जांच में जो डेटा सामने आया था वह 1977 से लेकर 2015 तक का था. जर्मनी के एक अखबार के मुताबिक, इस पेपर लीक से 2.6 टेराबाइट डेटा सामने आया है जो लगभग 600 डीवीडी में आ सकता है. शरीफ समेत अन्‍य लोगों ने टैक्स हैवन कंट्रीज में पैसा इन्वेस्ट किया. इन लोगों ने शैडो कंपनियां, ट्रस्ट और कॉरपोरेशन बनाए और इनके जरिए टैक्स बचाया.

नवाज शरीफ के बेटों हुसैन और हसन के अलावा बेटी मरियम नवाज ने टैक्स हैवन माने जाने वाले ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में कम से कम चार कंपनियां शुरू कीं. इन कंपनियों से इन्होंने लंदन में छह बड़ी प्रॉपर्टीज खरीदी. शरीफ फैमिली ने इन प्रॉपर्टीज को गिरवी रखकर डॉएचे बैंक से करीब 70 करोड़ रुपए का लोन लिया. इसके अलावा, दूसरे दो अपार्टमेंट खरीदने में बैंक ऑफ स्कॉटलैंड ने उनकी मदद की.

नवाज और उनके परिवार पर आरोप है कि इस पूरे कारोबार और खरीद-फरोख्त में अनडिक्लियर्ड इनकम लगाई गई. शरीफ की विदेश में इन प्रॉपर्टीज की बात उस वक्त सामने आई जब लीक हुए पनामा पेपर्स में दिखाया गया कि उनका मैनेजमेंट शरीफ के परिवार के मालिकाना हक वाली विदेशी कंपनियां करती थीं. शरीफ के परिवार के लंदन के 4 अपार्टमेंट से जुड़ा मामला भी उन 8 मामलों में शामिल है जिनकी नेशनल अकाउंटबिलिटी ब्यूरो (NAB) ने दिसंबर 1999 में जांच शुरू की थी.

पनामा मामले की जांच कर रही 6 मेंबर्स वाली जेआईटी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी थी. रिपोर्ट में कहा गया था कि 1990 में पीएम के तौर पर अपने दूसरे टेन्योर में शरीफ की फैमिली ने लंदन में प्रॉपर्टीज खरीदी थीं. रिपोर्ट में कहा गया है कि शरीफ और उनके बच्चों की लाइफस्टाइल उनकी आय के स्रोत से कहीं ज्यादा थी. शरीफ ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए जेआईटी की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था.

बड़ी हस्तियां अपने निवास के देश से बाहर जो खाते रखते हैं, उनका मकसद कई तरह के वित्तीय और कानूनी लाभों को लेना होता है. ये विदेशी खाते अधिकतर ऐसे देशों में रखे जाते हैं, जिन्हें ‘टैक्स हैवेन’ माना जाता है. इन खातों का उपयोग पैसे को देश के बैंकिंग सिस्टम की नजर से बचाकर बाहर ले जाने और टैक्स अथॉरिटीज़ की नज़र से बचाकर टैक्स सेविंग के लिए किया जाता है.

पनामा पेपर लीक में जिन हस्तियों का नाम सामने आया उनमें आइसलैंड के प्रधानमंत्री, यूक्रेन के राष्ट्रपति, सऊदी अरब के राजा और डेविड कैमरन के पिता का नाम प्रमुख है. इनके अलावा लिस्ट में व्लादिमीर पुतिन के करीबियों, अभिनेता जैकी चैन और फुटबॉलर लियोनेल मेसी का नाम भी था. हालांकि इन हस्तियों ने ऐसा कर कोई गैर-कानूनी काम किया है, इस बारे में पेपर्स में कुछ नहीं कहा गया था.