November 29, 2020

पचास हज़ार के मुचलके पर सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब गोस्वामी को अंतरिम ज़मानत दी- अजय मिश्रा

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दिल्ली/महाराष्ट्र:

 

पचास हज़ार के मुचलके पर सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब गोस्वामी को अंतरिम ज़मानत दी

 

SC में अर्णब गोस्वामी की याचिका पर सुनवाई जारी। अर्णब के वकील हरीश साल्वे-

 

अन्वय नाइक की कंपनी 7 साल से आर्थिक दिक्कत में थी

आशंका है कि उन्होंने अपनी माँ की हत्या की, फिर आत्महत्या

अर्णब ने सभी वेंडर को नियमित भुगतान किया

केस को दोबारा खोलने के लिए नियमों का पालन नहीं हुआ

 

साल्वे ने अर्णब और रिपब्लिक के खिलाफ हाल में दर्ज हुए सभी मामलों का हवाला दिया। कहा- एक के बाद एक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। इस मामले में केस को गृह मंत्री के कहने पर दोबारा खोला गया।

 

मजिस्ट्रेट को अर्णब को निजी बांड पर रिहा कर देना चाहिए था, इस केस को CBI के हवाले कर दिया जाए।

 

साल्वे- अगर अर्णब को रिहा किया गया तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा

 

महाराष्ट्र के वकील कपिल सिब्बल- इस मामले पर निचली अदालत में सुनवाई चल रही है।

 

जस्टिस चंद्रचूड़- क्या यह केस वाकई ऐसा है, जिसमें हिरासत में लेकर पूछताछ ज़रूरी है? क्या साल्वे के मुवक्किल पर सीधा कोई केस बन रहा है?

 

 

जस्टिस चंद्रचूड़ (सिब्बल से)- “क्या यह वाकई IPC 306 का केस है? व्यक्तिगत स्वतंत्रता ज़रूरी अधिकार है। भूल जाइए कि वह व्यक्ति कौन है। आपको उसके विचार पसंद हैं या नहीं। मैं खुद उनका चैनल नहीं देखना चाहता, लेकिन हमारे पास एक नागरिक आया है। हमें हर नागरिक के अधिकार की रक्षा करनी है।”

 

जस्टिस चंद्रचूड़- कोई चैनल पसंद नहीं है तो मत देखिए। अगर कोई फैसला देने के बाद मैं ट्विटर पर देखूं कि लोग क्या कह रहे हैं तो परेशान हो जाऊंगा। सरकार को कुछ बातों की उपेक्षा कर देनी चाहिए। इन बातों का चुनाव पर शायद ही कोई असर पड़ता है।

 

 

महाराष्ट्र के वकील अमित देसाई- निचली अदालत में मामला लंबित है। कल आदेश आ सकता है।

 

जस्टिस चंद्रचूड़- किसी को रिहा न करने के लिए हमारे पास 10 तकनीकी कारण हो सकते हैं। लेकिन निजी स्वतंत्रता के अधिकार की अपनी अहमियत है। अगर यह आतंकवाद या कोई और अति गंभीर मामला होता तो बात अलग होती।

 

महाराष्ट्र के वकील अमित देसाई- अगर कानून में कोई विकल्प उपलब्ध न हो तो HC या SC विशेष आदेश दे सकते हैं। यहां विकल्प है। इन्होंने उसका इस्तेमाल किया है। सेशन्स जज को फैसला लेने दीजिए। पुलिस ने भी जांच में कुछ तथ्य जुटाए हैं। हमें उन्हें निचली अदालत में रखने दिया जाए।

 

अमित देसाई- यह दलील कि राज्य को हर केस में नया तथ्य मिलने पर आगे जांच की बजाय पहले कोर्ट में जाना चाहिए, सही नहीं। किसी की स्वतंत्रता नहीं छीनी जा रही। इनके पास CrPC 439 के तहत निचली कोर्ट जाने का अधिकार था। इन्होंने HC का रास्ता चुना। अब निचली अदालत गए हैं। वहां फैसला होने दीजिए।

 

अन्वय नाइक के परिवार के वकील चंदर उदय सिंह-

“जांच अधिकारी ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। इस बात की हमारी जानकारी नहीं दी गई। बाद में पता चलने पर हमने इसकी कॉपी मांगी। वह भी हमें नहीं दी गई।”

 

दो बजे के बाद सुनवाई

 

अन्वय नाइक आत्महत्या मामला : SC ने रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्णब गोस्वामी को अंतरिम जमानत दी। 50,000 रु के निजी मुचलके पर ज़मानत। जस्टिस चंद्रचूड़ और इंदिरा बनर्जी की बेंच ने माना कि बॉम्बे HC को मामले में आरोपी को अंतरिम जमानत दे देनी चाहिए थी।