May 18, 2024

दूर हुई नवजात की अपंगता, परिजनों को मिली प्रसन्नता-

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*दूर हुई नवजात की अपंगता, परिजनों को मिली प्रसन्नता*

 

*• जन्मजात टेढ़े पंजों का उपचार कर चिकित्सक दे रहें नौनिहालों को नया जीवन*

 

*• 68 नवजात की समस्या को किया दूर*

 

*• शिव प्रसाद गुप्त मण्डलीय चिकित्सालय में होता है मुफ्त इलाज*

 

*•स्वयंसेवी संस्था के सहयोग से हर सप्ताह लगता है कैम्प*

 

*वाराणसी, 27,दिसम्बर 2021* बेटी के जन्म पर चौबेपुर निवासी शिवशंकर विश्वकर्मा के घर जश्न का माहौल था। लोग बधाइयाँ दे रहे थे पर शिवशंकर बेहद उदास थे । उदासी का कारण था नवजात बच्ची का टेढ़ा पंजा, जिसे देखने के बाद से ही उन्हें उसके भविष्य की चिंता सताये जा रही थी। चिंता में डूबे अभी एक सप्ताह ही हुआ था कि उनके घर आयी “आशा” ने उनकी सारी परेशानियों का समाधान कर दिया। आशा कार्यकर्ता ने बताया कि बच्ची को क्लब फुट यानि टेढ़े पंजे की विकृति है और उसका उपचार समय से हो जाए तो वह पूरी तरह ठीक हो जाएगी। आशा के सुझाव पर उन्होंने बेटी का उपचार शिव प्रसाद गुप्त मण्डलीय चिकित्सालय में शुरू कराया। अब बेटी ढाई साल की हो चुकी है। वह सामान्य बच्चों की तरह चलती-फिरती और दौड़ती है। शिवशंकर कहते हैं मण्डलीय अस्पताल के डाक्टरों ने उनके बेटी की जिंदगी बना दी वह भी मुफ्त उपचार से। सिर्फ शिवशंकर ही नहीं क्लबफुट (जन्मजात टेढ़े पंजे) से पीड़ित 68 से अधिक नवजातों का मण्डलीय अस्पताल में मुफ्त उपचार कर चिकित्सक उन्हें नया जीवन दे चुके हैं।

 

*क्या है क्लब फुट-*

 

क्लबफुट (टेढ़े पंजे) एक जन्मजात विकृति है। ऐसे बच्चों के पंजे जन्म से ही अंदर की ओर मुडे होते हैं। किसी बच्चे का दोनो पैर तो किसी बच्चे का एक पैर भी अंदर की ओर मुड़ा हुआ हो सकता है। गंभीर मामलों में पंजे उल्टे भी हो सकते हैं।

 

*राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के नोडल अधिकारी व अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अशोक कुमार गुप्ता* बताते हैं कि आरबीएसके के तहत ऐसे बच्चों का उपचार पूरी तरह निःशुल्क किया जाता है। उन्होंने बताया कि देश में प्रत्येक 800 में एक बच्चा क्लबफुट के साथ पैदा होता है। अगर समय से उपचार हो तो ऐसे बच्चे पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। वह सामान्य बच्चों की तरह क्रिया-कलाप कर सकते हैं। यहां तक कि बड़े होने पर खेल-कूद प्रतियोगिताओं में भी शामिल होने योग्य हो जाते हैं। क्लबफुट पीड़ित बच्चों के अभिभावकों को इसका पूरा लाभ उठाना चाहिए। ऐसे नवजात बच्चों का उपचार जितनी जल्द शुरू हो उतना ही प्रभावी परिणाम आते हैं।इस तरह होता है उपचार- बच्चों के पंजों में चार से छह सप्ताह तक प्लास्टर लगाया जाता है। इसके पश्चात पंजे के पिछले हिस्से में एक मामूली चीरा लगाकर पुनः प्लास्टर लगा दिया जाता है। इस प्लास्टर को भी 21 दिन बाद काट दिया जाता है और बच्चे के पैरों में ब्रेस (विशेष रुप से तैयार किये गये जूते) पहनाये जाते है। तीन से -पांच वर्ष में ऐसे बच्चे पूरी तरह सामान्य हो जाते हैं।

 

प्रत्येक सप्ताह लगता है कैम्प-

*डीईआईसी (आरबीएसके) के प्रबंधक डा. अभिषेक त्रिपाठी* ने बताया कि क्लबफुट पीड़ित बच्चों के उपचार के लिए संस्था के सहयोग से शिव प्रसाद गुप्त मण्डलीय चिकित्सालय के कक्ष संख्या 11 में प्रत्येक बुधवार को कैम्प का आयोजन किया जाता है।

 

ब्लाक चौबेपुर के चार, हरहुआं के चार, सेवापुरी के आठ, चिरईगांव के चार, पिण्डरा के 12 और बड़ागांव के चार बच्चे शामिल हैं। शेष 24 बच्चे शहरी क्षेत्र के हैं। मण्डलीय चिकित्सालय के हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डा. ए.के. राय, डा. एके सिन्हा के प्रयास का नतीजा है कि इनमें अधिकांश बच्चे अब सामान्य रूप से चलने-फिरने लगे हैं। उन्होंने बताया कि क्लबफुट प्रभावित बच्चों का उपचार पूरी तरह निःशुल्क होता है और यदि किसी को क्लबफुट पीड़ित शून्य से 2 वर्ष तक के बच्चे का उपचार कराना है तो वह उनसे 9136945515 नम्बर पर सम्पर्क कर सकता है।

 

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