July 18, 2024

खजनी थाना क्षेत्र के मऊधरमंगल गांव में गोली कांड का मामला-

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*पुलिसिया खेल में एक नया मोड़*

 

*खजनी थाना क्षेत्र के मऊधरमंगल गांव में गोली कांड का मामला*

 

*मोबाइल का सीडीआर खोलेगा असली मास्टरमाइंड का राज*

 

*शनिवार को समाधान दिवस के दौरान मास्टर माइंड के कहने पर ओम प्रकाश यादव ने अपने भाइयों को बताई योजना,ड्यूटी से भागकर शनिवार रात आए दोनो सिपाही, रविवार सुबह घटना को दिया अंजाम*

 

खजनी। खजनी थाना क्षेत्र के मऊधर मंगल गोली कांड में पुलिसिया खेल का अचानक एक नया मोड़ आ गया।एक तरफ एसएसपी ग्रोवर ने मामले में दोषी हल्का दरोगा बांके यादव समेत दो पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया है वही अगर सूत्रों की माने तो खजनी थाने के समस्त पुलिस स्टॉप का घटना के दो दिन पहले व घटना के दिन का मोबाइल सीडीआर निकाला जाय तो पता चल जाएगा कौन पुलिसकर्मी से हमलावरों की साठ गांठ थी।कौन कौन से लोग मामले की डिलिंग में संलिप्त थे।जिसकी वजह से एक बड़ी घटना घट गई।

सूत्रों के अनुसार, हमलावर के परिवार में चार लोग सरकारी कर्मचारी थे। इनके परिवार में ₹300000 से अधिक प्रति महीने आमदनी थी।वर्तमान में पूरे गांव में इनके मुकाबले आमदनी वाला और कोई परिवार में नहीं था।जब मकान के छज्जे का विवाद शुरू हुआ तो विपक्षी की औकात इनके सामने कुछ भी नहीं था।इसलिए विपक्षी का विरोध इस परिवार को नागवार लगा।गांव में अपना पतंगा फहराने आने के लिए किसी कीमत पर यह परिवार नतमस्तक होने के लिए तैयार नहीं था। इस परिवार के लोगो का समाजवादी नेताओं में अच्छी पैठ थी।इसलिए लखनऊ में निलंबित सिपाही प्रमोद यादव ने अपने विभागीय खजनी पुलिसकर्मियों से ताना बाना बुनकर एक योजना तैयार किया।जिसमें खजनी पुलिस के कुछ लोग शामिल थे जो मोटी गड्डी लेकर मदद करने का भरोसा दिया था।मोबाइल की सीडीआर से पता चल जाएगा थाने की कौन-कौन पुलिसकर्मियों ने हमलावरों का सहयोग किया था। शनिवार को समाधान दिवस था। समाधान दिवस में आरोपित ओम प्रकाश यादव ने पूरे दिन किस-किस पुलिसकर्मी के साथ मिलकर रविवार के दिन योजना बनाई थी।यह पता चल जाएगा।वारदात से लगभग 1 महीने से दोनों पक्षों के बीच छज्जे को लेकर विवाद चल रहा था लेकिन गिट्टी व मसाला बनाने वाली मशीन क्यों रविवार सुबह घटनास्थल पर पहुंची।लखनऊ में दीवान प्रमोद यादव व एसएसबी जवान भगवान दास उर्फ मुन्ना यादव क्यों शनिवार रात्रि ड्यूटी के दौरान भागकर घर आए।यह एक सोचनीय प्रश्न है।ऐसे में यह कहना कदापि अतिशयोक्ति नहीं होगा कि एक दिन पहले यानी शनिवार को ही थाने पर योजना बन चुका था। गोली चलने वाले घटनास्थल से थाना मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित था लेकिन पुलिस सूचना के 1 घंटे बाद क्यों पहुंची। घटना के दिन रविवार सुबह हमलावरों से किस-किस पुलिसकर्मियों से बात हुई थी।यह मोबाइल लोकेशन से पता चल जाएगा।मास्टरमाइंड ने किसी दूसरे के कंधे पर बंदूक रखकर गोली चला दी है।अब वह पुलिस कार्रवाई से दूर है। अगर मामले में निष्पक्ष जांच होता है तो मास्टरमाइंड की करतूत सामने आ जाएगी और आगे के लिए पुलिस महकमें में एक नजीर बनेगी।दोषी को सजा और निर्दोष दोषमुक्त होंगे ।