August 14, 2020

कोरोना के इलाज के लिए सिप्ला ने लॉन्च की ‘सिप्रमी’ दवा, सरकार ने दी मंजूरी

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कोरोना के इलाज के लिए सिप्ला ने लॉन्च की ‘सिप्रमी’ दवा, सरकार ने दी मंजूरी

देश में बढ़ रहे कोरोना मरीजसिप्ला ने पेश की दवा सिप्रमी देश में कोरोना वायरस के मामलों में उछाल देखा जा रहा है. हर रोज कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार बढ़ती ही जा रही है. इस बीच फार्मा कंपनी सिप्ला ने कोरोना वायरस के इलाज के लिए रेमडेसिवीर दवा को पेश किया है. सिप्ला ने सिप्रमी (Cipremi) नाम से इस दवा को लॉन्च किया है.ADS कोरोना पर फुल कवरेज के लि‍ए यहां क्ल‍िक करें सिप्ला को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) के जरिए रेमडेसिवीर दवा पेश करने की अनुमति मिल गई है. जिसके बाद सिप्ला ने सिप्रमी (Cipremi) के नाम से इस दवा को पेश किया है. कोविड-19 के गंभीर मरीजों के उपचार के लिए इस दवा का इस्तेमाल किया जाता है. कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें… बता दें कि यूएस एफडीए ने इमरजेंसी यूज ऑथोराइजेशन (ईयूए) के तहत हाल ही में गिलियड साइंसेज की दवा रेमडेसिवीर को कोरोना वायरस के इलाज के लिए मंजूरी दी थी. जिसके बाद मई के महीने में गिलियड साइंसेज ने सिप्ला को इस दवा के विनिर्माण और विपणन की नॉन-एक्सक्लुसिव मंजूरी दी थी. देश-दुनिया के किस हिस्से में कितना है कोरोना का कहर? यहां क्लिक कर देखें अब सिप्ला की ओर से रिस्क मैनेजमेंट प्लान के तहत सिप्रमी दवा के इस्तेमाल के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी. वहीं मरीजों की ओर से सहमति का एक फॉर्म भी भरना होगा. साथ ही पोस्ट मार्केट सर्विलांस के अतिरिक्त सिप्ला मरीजों पर चौथे चरण का ​क्लिनिकल ट्रायल भी करेगी. यह भी पढ़ें: कोरोना के इलाज के लिए ग्लेनमार्क की दवा फेबिफ्लू को सरकार ने दी मंजूरी सिप्रमी को लॉन्च करते हुए सिप्ला के एमडी और ग्लोबल सीईओ उमंग वोहरा ने कहा कि सिप्ला भारत में मरीजों के लिए रेमडेसिवीर लाने के लिए गिलियड के साथ मजबूत साझेदारी की सराहना करती है. हमने कोविड-19 महामारी से प्रभावित लाखों लोगों की जान बचाने के लिए सभी संभावित रास्ते तलाशने में गहराई से निवेश किया है और यह उस दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. रेमडेसिवीर का ट्रायल बता दें कि अमेरिका, यूरोप और एशिया के 60 सेंटर्स में 1063 मरीजों पर रेमडेसिवीर का ट्रायल किया जा चुका है. इस ट्रायल में अस्पताल में भर्ती किए गए मरीजों को दवा के कारण जल्दी रिकवर होने में मदद मिली. इनमें ज्यादातर मरीज ऑक्सीजन थेरेपी पर थे. वहीं रेमडेसिवीर दिए जाने वाले मरीजों में मृत्यु दर 7.1 फीसदी थी.