October 20, 2021

इम्तियाज हत्याकाण्ड की जांच एनआईए से कराने की परिजनों ने लगाई गुहार।

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कृष्ण मोहन उर्फ बग्गा

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सोनभद्र। जिले में खनन और आशनाई को लेकर हुई खनन व्यवसायी इम्तियाज अहमद हत्याकाण्ड की जांच एनआईए से कराने की मांग अधिवक्ता अमान खान ने किया है। आज प्रेसवार्ता करके अधिवक्ता अमान खान ने कहा कि नगर पँचायत अध्यक्ष की हत्या झारखण्ड राज्य का प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन झारखण्ड जनमुक्ति परिषद द्वारा अंजाम दिया गया है । इस संगठन से इम्तियाज हत्याकांड में नामित राकेश जायसवाल व रवि जालान ने एक मोटी रकम देकर करयाई गयी है क्योकि मौके पर झारखण्ड जनमुक्ति परिषद का एरिया कमाण्डर काश्मीर पासवान को लोगो ने मय कार्बाइन के पकड़ा था। इस घटना का पुलिस अधीक्षक द्वारा सफलता पूर्वक कार्रवाई करते हुए घटना में सम्मिलित अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया । इस घटना का आश्चर्य जनक पहलू यह है कि पुलिस ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन झारखण्ड जनमुक्ति परिषद की भूमिका का जांच न करके सामान्य हत्या का प्रकरण मान करके विवेचना कर रही है जबकि वादी मुकदमा उस्मान अली ने केन्द्रीय गृहमंत्री एवं मुख्यमंत्री सहित आला अधिकारियों को पत्र लिखकर हत्या के अभियुक्तों के विरुद्ध यूपीए एक्ट के ससँगत विधिक प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। अधिवक्ता अमन खान ने कहा कि हत्या में शामिल काश्मीर पासवान और अखिलेश ठाकुर को जनपद न्यायायल औरंगाबाद बिहार द्वारा एक अन्य आपराधिक प्रकरण में उम्र कैद की सजा सुनाई है जिसे पटना उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा है। इस प्रकरण में गिरफ्तार दोनों अभियुक्त फरार चल रहे है। चोपन पुलिस ने न्यायालय में आख्या रिपोर्ट जसमे महत्वपूर्ण तथ्यों एवं अभिलेखों को गम्भीरता पूर्वक अन्वेषण कर अभियोजन की कार्रवाई करने के बजाय गोलमोल आख्या दी है। जिले में पहली बार प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन झारखण्ड जनमुक्ति परिषद द्वारा योजनबद्ध तरीके से जनता में भय का माहौल उत्पन्न करने एवं अपने जड़ो को जमाने के लिए चेयरमैन की हत्या की गई। चोपन पुलिस ने हत्या का अनावरण सराहनीय है लेकिन प्रतिबंधित संगठन झारखण्ड जनमुक्ति परिषद की हत्या में सीधी संलिप्तता होने के बावजूद पुलिस द्वारा यूपीए एक्ट के प्रावधानों के अंतर्गत कार्यवाही करने के बजाय कर्तव्यों की इतिश्री की जा रही है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायायल में दाखिल प्रार्थना पत्र में एक अतिरिक्त प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया जिसमें पटना उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश की सत्यप्रति एवं काश्मीर पासवान का क्रिमनल अपील झारखण्ड पुलिस द्वारा आरटीआई में दी गयी झारखण्ड जनमुक्ति परिषद को प्रतिबन्धित करने की रिपोर्ट की सत्यप्रति देकर विधि सम्मत तरीके से पुलिस द्वारा जांच करने एवं प्रकरण में यूपीए एक्ट के प्रावधान के अंतर्गत कार्यवाही करने की याचना की गई है। भारत सरकार ने ऐसे मामले से ननिपटने लिए विशेष जांच एजेंसी एनआईए का गठन किया गया है जो पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई करती है चुकी भारत सरकार को उग्रवाद घटना की अधिकारी सूचना ही नही दी गयी ऐसे में एनआईए इस घटना की जांच से दूर है। वादी अधिवक्ता होने के नाते न्यायालय और प्रदेश व केन्द्र सरकार से इस हत्या में प्रतिबंधित संगठन के शामिल होने के कारणों समेत हत्या के तथ्यों की जांच एनआईए से कराने की मांग करते है।

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