October 19, 2021

अमित शाह ने कल आगरा में बनाई मिशन 2019 की रणनीति, महागठबन्धन दिखा बेचैन

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आगरा – कल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आगरा आए,उनके आने से पश्चिमी यूपी के गैर भाजपाई दलों के बीच संभावित महागठबंधन को लेकर बेचैनी दिखाई दी,अमित शाह ने विपक्षी दलों को धराशाई करने के टिप्स दिए व 2019 में फिर से कमल खिलाने को लेकर युवाओं को साथ लेकर चलने को भी ज़ोर दिया।शाह ने आज के तकनीकी युग में सोशल मीडिया को हथियार बनाने पर ज़ोर दिया।

अमित शाह ने मुख्मंत्री, मंत्रियों व पदाधिकारियों के साथ 2019 के चुनावों को लेकर कई घंटों तक बैठक की ।बैठक में शामिल पदाधिकारियों की माने तो पश्चिमी प्रांत, ब्रज प्रांत और कानपुर क्षेत्र के रणनीतिकारों की तरफ से महागठबंधन की सामने दिख रही चुनौती को गंभीरता से रखा गया। पदाधिकारियों का तर्क था कि 2014 में गैरबीजेपी दल बिखरे हुए थे। इस बार अभी एकजुट दिख रहे हैं।
महागठबंधन होने का असर बताया गया कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कुल 42.6 प्रतिशत वोट मिले थे। अलग अलग चुनाव लड़ने पर एसपी 22.4 और बीएसपी को 19.8 यानी 42.2 प्रतिशत वोट मिले थे। आरएलडी, कांग्रेस और दूसरे छोटे दलों को मिले वोट इन दोनों दलों से अलग हैं। चिंता जताई गई कि बीजेपी 2017 के विधानसभा चुनाव में सरकार भले ही बना ली हो, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव के बराबर वोट हासिल नहीं कर पाई। 2017 में बीजेपी को एक प्रतिशत वोट कम यानी 41.6 प्रतिशत वोट मिल पाए थे। जबकि इसी विधानसभा चुनाव में एसपी और बीएसपी का वोट प्रतिशत बढ़ा था । एसपी को 28.3 और बीएसपी को 22.2 वोट मिले। एसपी का करीब 6 और बीएसपी का करीब 3 प्रतिशत वोट बढ़ गया। दोनों का मिलाकर वोट प्रतिशत 50.5 फीसदी तक जा पहुंचा।
इसी तरह एसपी और बीएसपी की नजदीकी के वजह से गोरखपुर, फूलपुर, कैराना और नूरपुर उपचुनाव में भी बीजेपी से ज्यादा वोट विरोधी दलों को मिले। पदाधिकारियों ने इसे बड़ी चिंता की वजह मानते हुए, इससे निपटने के कारगर कदम उठाने की राय राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने रखी। बीजेपी के भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने साफ कहा कि इससे निपटने के लिए पार्टी को मिलने वाले वोट प्रतिशत को बढ़ाकर 51 फीसदी करने का रणनीति है, इस पर गंभीरता से आगे बढ़ना है। इसके लिए वोटर लिस्ट पर नजर रखनी होगी। वोटर लिस्ट के सत्यापन के लिए डोर-टू-डोर और ‘मैन टू मैन मिलना होगा। नए वोट बनवाने और बोगस वोट कटवाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। कहा कि पश्चिम, ब्रज और कानपुर इन तीनों क्षेत्रों 39 लोकसभा सीटें बीजेपी आसानी से जीत सकती हैं। यहां पार्टी की मजबूत टीम काम करने के लिए है।
बीजेपी में इस बात को लेकर भी चिंता दिखी कि महागठबंधन होने पर दलित, मुस्लिम और पिछड़ों के एक साथ आने से कैसे रोका जाए। तर्क था कि वेस्ट यूपी में दलित और मुस्लिम का गठजोड़ होने से सीधा नुकसान होने का खतरा ज्यादा है। तरह ब्रज में दलित-यादव की एकता से उलटफेर का खतरा हो सकता हैं। इस समीकरण के चलते 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव और 2009 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की स्थिति यहां कमजोर रही थी। 2014 में मोदी लहर में ज्यादा सीटें बीजेपी को मिल गई थी। उसी का असर 2017 के विधानसभा चुनाव में दिखा।

इसी तरह ब्रज और कानपुर में भी इन जातियों के एक होने से सिरे से रणनीति बनानी होगी। संकेत दिए गए कि दलितों और पिछड़ों को पार्टी में सम्मान औऱ महत्व दिया जाएगा। अहदम जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। उन्हें संगठन और मंत्रिमंडल मे अजस्ट जल्द किया जा सकता हैं। मंत्रिमंडल के फेरबदल और विस्तार के साथ कुछ सांसदों के टिकट कटने के संकेत भी शाह की तरफ से दिए गए। वर्करों को बताया गया कि आम जनता के बीच कनेक्टिविटी बढ़ानी होगी। विरोधी दलों के बेमेल गठबंधन की खामियों को बताकर बीजेपी से उन्हें जोड़ना होगा। प्रफेशनल में पैठ बनाने, बुद्धिजीवियों का साथ हासिल करने के लिए काम करने की हिदायत दी गई।

सोशल मीडिया को बनाओ हथियार
पार्टी से जुड़े आईटी के एक्सपर्ट से कहा गया कि ये वक्त संचार क्रांति का है। सोशल मीडिया मैन टू मैन पहुंचने के लिए मजबूत हथियार हैं। आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने प्लान के बारे में बताया कि हर युवा को टार्गेट करना होगा। कालेज, यूनिवर्सिटी, कॉर्पोरेट दफ्तर, सौ से ज्यादा एंप्लाई से काम लेने वाली बड़ी फैक्ट्रियों आदि में संपर्क करना होगा। हर बूथ पर कम से कम 25 नए लोगों क जोड़ा जाए। लक्ष्य 30 लाख नए लोगों को पार्टी से जोड़ने रहेगा तब वोट प्रतिशत का बढ़ना भी तय है।