November 27, 2021

*अतुल राय का बिरोध आधा दर्जन बसपा नेताओं पर गिरी गॉज

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*वाराणसी/मऊ:* महागठबंधन की सीटों का ऐलान नहीं हुआ है। बावजूद इसके बसपा प्रमुख मायावती चुनिंदा सीटों पर प्रभारी के रूप में संभावित प्रत्याशियों की घोषणा करती जा रही है। इस दूसरे दल सपा की तरफ से भले प्रतिक्रिया न देखने को मिली हो लेकिन बसपा में विद्रोह के स्वर उठने लगे हैं। अनुशासित और पार्टी आलाकमान का आदेश सर्वोपरि मानने वाली बसपा कार्यकर्ताओं ने अतुल राय के विरोध में किया प्रदर्शन का सिलसिला आरम्भ कर दिया है। इसकी भनक मिलने का बाद बसपा आला कमान चौकन्ना हो गया क्योंकि विरोध की आग दूसरी जगहों पर भी सुलग सकती थी। नतीजा, पूर्व सांसद बालकृष्ण चौहान, बैजनाथ राव , डा. सोचन भारती, ओमप्रकाश , हरिनाथ प्रसाद और अमीन कुरैँशी को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने और घोर अनुशासनहीनता के आरोप में बसपा से निष्कासित कर दिया। बसपा के जिलाध्यक्ष राजीव कुमार राजू ने भले प्रेस नोट में इतने नाम दिये लेकिन सूत्रों की माने तो कई और बड़े नामों पर भी गॉज गिर सकती है।

*बाहरी प्रत्याशी बताते हुए हो रहा विरोध*

गौरतलब है कि मंगलवार को बसपा की बैठक एक प्लाजा में बुलायी गयी थी जहां पर नवनियुक्त जिला प्रभारी अतुल राय को कार्यकर्ताओं के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध-प्रदर्शन करनेवाले अतुल राय बाहरी बताते हुए जिले का प्रत्याशी बनाए जाने की मांग कर रहे थे। उनकी मांग थी कि पार्टी का प्रत्याशी जनपद के किसी नेता को बनाया जाए। क्षुब्ध कार्यकर्ताओं ने अतुल राय मुुदार्बाद के साथ वापस जाओ के नारे लगा रहे थे। अरोप है कि विरोध-प्रदर्शन करने वालों की अतुल राय के समर्थकों ने पिटाई के साथ अभद्रता भी की। मुख्य जोनल कोआर्डिनेटर ने ज्ञापन लेने से इनकार करते हुुए वहां से जाने को कह दिया जिसके बाद मामला और गरमाता गया। प्रदर्शन करने वालों में ओम प्रकाश , डा. सोचन भारती, राम बचन राव , जयराम चौहान , हरिनाथ प्रसाद , देवेंद्र कुमार ,अजय, नागेंद्र , बैजनाथ राव, सिंटू सिंह, सुनील कुमार गौतम रामानंद , पारस राम , शिवचंद राम, अरविंद , राम वीर , डा. राममूरत यादव , चंद्रभान , श्याम सुंदर , राम दुलारे, नागेंद्र प्रधान , लल्लन प्रधान और विनोद चौहान आदि थे लेकिन इसके पीछे पूर्व सांसद का हाथ बताया गया।

*चंद लोग कर रहे थे पार्टी को कमजोर*

विरोध-प्रदर्शन के बाबत घोसी के नवनियुक्त प्रभारी अतुल राय का कहना था कि चंद लोग ही इसमें शामिल थे और बसपा का एक भी कार्यकर्ता ऐसा नहीं कर सकता। दरअसल यही लोग हैं जो पिछले कई सालों से बसपा को कमजोर कर रहे हैं। बसपा विधान सभा का पूरा संगठन व कार्यकर्ता पार्टी के साथ है। विरोधियों के मंसूबे सफल नहीं होंगे और महागठबंधन की जीत सुनिश्चित देख प्रायोजित विरोध कराया गया था।